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व्यभिचार कानूनः केंद्र सरकार का SC को जवाब, 497 हटाने संबंधी याचिका करें खारिज

Publish Date: July 11 2018 08:25:30pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): विवाहित महिला किसी गैर मर्द से शारीरिक संबंध बनाए तो सिर्फ उस मर्द को पांच साल की कैद या जुर्माना या दोनों ही सज़ा हो सकती है लेकिन इस मामले में महिला को सज़ा क्यों नहीं दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट में कानून के इस प्रारूप को लैंगिक भेद पर आधारित बताते हुए एक याचिकाकर्ता द्वारा याचिका दायर की गई थी। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। इस याचिका के जवाब में केंद्र सरकार ने कोर्ट से कहा कि वो मौजूदा कानून में किसी भी बदलाव के पक्ष में नहीं है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वो व्यभिचार कानून के नाम से चर्चित आईपीसी की धारा 497 को कमजोर करने की याचिका को खारिज कर दें क्योंकि ये धारा विवाह संस्था की सुरक्षा करती है और इससे छेड़छाड़ करना भारतीय संस्कृति के लिए हितकारक साबित नहीं होगा।

आपको बता दें कि एक याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि आईपीसी की धारा-497 के तहत व्यभिचार के मामले में पुरुषों को दोषी मिलने पर सजा का प्रावधान है जबकि महिलाओं को इससे छूट दी गई है। याचिकाकर्ता ने इसे कानून लैंगिक भेदभाव बताते हुए इसे गैर संवैधानिक घोषित करने के लिए याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने कहा था कि धारा 497 को रद्द कर दिया जाना चाहिए क्योंकि यह असंवैधानिक, न्यायविरुद्ध, अवैध और मनमानी है एवं इससे मौलिक अधिकारों को हनन होता है। बता दें कि जनवरी में इस मामले की सुनवाई को पांच जजों की संविधान पीठ को भेज दिया गया था। 

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