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हरियाणा

आय का साधन हो तभी बेटी से मांगे गुजारा भत्ता : हाईकोर्ट

Publish Date: January 11 2018 08:10:10pm

चंडीगढ़(उत्तम हिन्दू न्यूज): मैंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट को लेकर हाईकोर्ट ने अपने आदेश में विवाहित बेटी की परिजनों के प्रति जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि अगर विवाहित बेटी जिसकी आय का कोई साधन नहीं है तो उससे गुजारा भत्ता नहीं मांगा जा सकता। 
हाईकोर्ट ने यह आदेश होशियारपुर के मैंटेनेंस ट्रिब्यूनल के आदेश को रद करते हुए दिया। ट्रिब्यूनल ने आदेश दिए थे कि बेटा व बेटी दोनों मां को हर माह 3300 रुपये गुजारा भत्ता दें। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि विवाहित बेटी की कमाई का कोई साधन नहीं है तो उस स्थिति में उसके मां-बाप गुजारा भत्ता नहीं मांग सकते हैं।
आय का साधन न होने पर बेटी ससुराल पर निर्भर है और ऐसे में उसे गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। मैंटेनेंस ट्रिब्यूनल के सामने दायर याचिका में मां ने कहा था कि उनकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है। उनके बेटा व बेटी ख्याल नहींं रखते हैं और तबीयत खराब होने के चलते इलाज के लिए उसे गुजारा भत्ता दिया जाए।
हाईकोर्ट में बेटी और बेटे दोनों ने याचिका दाखिल करते हुए ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने सभी दलीलों को सुनने के बाद इस याचिका का निपटारा करते हुए बेटी की याचिका को मंजूर कर लिया जबकि बेटे की याचिका खारिज कर दी।
हाउस वाइफ बेटी पति पर निर्भर
हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बेटी हाउसवाइफ है और पूरी तरह से पति की आय पर निर्भर है। एक्ट के प्रावधान के तहत पति की आय से उसे गुजारा भत्ता देने को बाध्य नहीं कर सकते। वहीं बेटे को जिम्मेदार मानते हुए चार हजार रुपये प्रतिमाह मां को भुगतान का आदेश जारी किया।

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