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हरियाणा

मोहन भागवत के सामने नामधारी गुरु का बड़ा ऐलान, अयोध्या में बनवाएंगे राम मन्दिर

Publish Date: April 04 2018 06:34:01pm

सिरसा (कृष्ण तिवाड़ी) : नामधारी पंथ के तत्वावधान में सिरसा की अनाज मंडी में आज हिंदू-सिख एकता को समर्पित समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए। नामधारी समाज के सतगुरू ठाकुर दलीप सिंह के संयोजन में आयोजित हुए इस नामनवमी पर्व समारोह में विभिन्न अखाड़ों, मठों के संत भी शामिल हुए। इस अवसर पर आरएसएस प्रमुख डा. मोहन भागवत ने नामधारी पंथ द्वारा आयोजित इस आयोजन की सराहना की।

उन्होंने कहा कि धर्म का मूल कार्य जोडऩा है, तोडऩा नहीं। समारोह में मौजूद लोगों को राष्ट्र की एकता का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि जहां जोडऩे की बात हो वहां सुखशांति होती है। विज्ञान और तकनीक के विकास पर चरणबद्ध चर्चा करते हुए डा. मोहन भागवत ने कहा कि बेशक दूसरे राष्ट्र तकनीकी तौर पर भारत से समृद्ध होंगे लेकिन सुख, शांति और समरसता की तलाश में वे भारत की ओर देखते हैं। सम्पूर्ण विश्व सुख, शांति, समाधान देने का एकमात्र रास्ता भारत को ही मानता है। वसुधैव कुटुम्बकंभ की भावना को भारत की विशेषता और महानता बताते हुए डा. भागवत ने कहा कि बेशक इस राष्ट्र में अलग-अलग पंथ हैं, सम्प्रदाय हैं लेकिन अपनत्व के सूत्र में सभी लोग बंधे हैं। उन्होंने अपने सम्बोधन में महाभारत, रामायण और अनेक प्राचीन ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया का विनाश रोकने के लिए लडऩा होगा। सर्वत्र के भले से ही कल्याण संभव है। धर्म को चौथा पुरूषार्थ बताते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि रामनाम रस के समक्ष स्वर्ग का अमृत भी फ ीका है। उन्होंने उपस्थित लोगों का आह्वान किया कि वे अपने रास्ते पर चलें और दूसरे के रास्ते का सम्मान करें। इस अवसर पर आयोजनकर्ता नामधारी गुरू दलीप सिंह ने डा. भागवत को तुलसी का पौधा और राम दरबार का स्वरूप स्मृति चिन्ह के रूप में सौंपा।

इस अवसर पर सतगुरु दलीप सिंह ने कहा गुरबाणी में भगवान श्री राम चंद्र जी को प्रभु अवतार और त्रेते के सतगुरु लिखा है, जिसके कारण वह हमारे पूजनीय हैं। बाणी में प्रभु अवतार लिखे होने के कारण हम रामनवमी मनाते हैं। अयोध्या में राम मंदिर बनाना हमारा अधिकार है, हम नामधारी अग्रणी होकर मंदिर बनाएंगे। इस अवसर पर महंत रमेश्वर दास, स्वामी अदित्यात्मानंद पुरी, स्वामी अतुल कृष्ण, बाबा यादविंद्र जीत सिंह, बाबा हरचरणदा, बाबा ब्रह्मदास, महंत राजेंद्र गिरी सहित अनेक साधु संत समाज के लोगों ने शिरकत की। पंजाबी गायिकी के बादशाह हंस राज हंस  ने भी हाजिरी लगाते हुए बहुत ही सुरीली आवाज में भजन गाकर सभी संगतों को मंत्र-मुग्ध किया। इस अवसर पर बजरंग लाल जी, देवी प्रसाद, हेमराज, विवेका नंद, रमेश गुप्ता जी, पवन कोशिक, सुरेंद्र मल्होत्रा, अविनाश राय सहित काफी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे। अंत में देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया गया व समाज की उन्नति के लिए अरदास की गई। 



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