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हरियाणा स्कूल प्रवेश फॉर्म में भरने होंगे सौ कॉलम, मचा बवाल

Publish Date: April 12 2018 12:21:16pm

चंडीगढ़  (उत्तम हिन्दू न्यूज): हरियाणा में स्कूलों में छात्रों के प्रवेश के लिए दिये जा रहे फॉर्म में सौ कॉलम भरने होंगे और जाति -श्रेणी से लेकर अभिभावकों के व्यावसाय, पैन संख्या, बैंक खातों का विवरण भी देना होगा जिस पर बवाल मच गया है। फॉर्म में एक कॉलम में यह भी बताना है कि बच्चे को जेनेटिक डिस्ऑर्डर तो नहीं है। अभिभावकों में इस फॉर्म को लेकर रोष है और कईयों ने सवाल उठाया है कि वह स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए भेज रहे हैं, खुद की डिटेल देने या ऐसी गैरजरूरी जानकारी देने के लिए नहीं जिनका बच्चो से कोई लेना-देना नहीं है। स्कूलों ने सफाई दी है कि वह सिर्फ 'ऊपर' से मिले आदेशों का पालन कर रहे हैं।

इस बीच हरियाणा सरकार ने शाम को एक बयान जारी कर स्पष्ट करना चाहा कि उनका आशय यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश के प्रत्येक स्कूल में हर छात्र भारत सरकार और हरियाणा सरकार की प्रत्येक योजना का पूरा लाभ प्राप्त करने के लिए सक्षम है और यदि ऐसा लाभ मौद्रिक है तो उसके सीधे अपने खाते में जाए। 

इस मामले में एक राजनीतिज्ञ के टवीट, मीडिया के एक हिस्से में आई खबरों और गुरुग्राम की एक सिविल सोसायटी ग्रुप के ऐतराज को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के एक सरकारी प्रवक्ता ने दावा किया वर्तमान प्रवेश फार्म में कोई भी नया शब्द गढ़ा नहीं गया है। प्रवक्ता के अनुसार फार्म में माता-पिता के पेशे के साथ एक विशेष विशेषण (जाति और श्रेणी) के इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि यह विशेषण है और यह भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की एक योजना का हिस्सा रहा है, यह पहले 21 जनवरी 2009 को संशोधित किया गया और बाद में 2011 में आखिरी बार संशोधित हुआ था।

'एक छात्र के बैंक खाते के साथ वह क्या करेंगे के सवाल पर प्रवक्ता ने कहा कि विभाग जाहिर तौर पर इस बैंक खाते में सभी तरह की नकद अनुदान और छात्रवृत्ति भेज देगा। उन्होंने कहा कि अभिभावकों से उनके पैन नंबर को साझा करने के लिए नहीं कहा जा रहा है, उन्हें अपनी वार्षिक आय का खुलासा करने के लिए कहा जा रहा है क्योंकि व्यावहारिक रूप से सभी छात्रवृत्ति योजनाओं में आय की अधिकतम सीमा होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रवेश पाने वाले छात्र की आधार संख्या अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार अंतोदय की भावना से अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के लिए कदम उठा रही है, परंतु जो इस पर आपत्ति व्यक्त कर रहे हैं, यह उनकी छोटी मानसिकता को दर्शाता है। 
 

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