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सीएम जयराम ठाकुर की विधायकों को दो टूक, परियोजनाओं में देरी करने वाले ठेकेदारों से न करवाएं काम 

Publish Date: February 13 2018 06:56:54pm

शिमला (जेमी शर्मा) : मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने 2018-19 की वार्षिक योजना के लिए विधायकों की प्राथमिकताओं को अंतिम रूप देने के लिए आयोजित की गई बैठक की अध्यक्षता करते हुए लागत और अधिक समय से बचने के लिए विकास योजनाओं को समयबद्ध पूरा करने पर बल दिया। बैठक में जयराम ठाकुर ने कहा कि कार्यान्वयन चरण में योजनाओं की नियमित रूप से निगरानी करना आवश्यक है। उन्होंने ऐसे ठेकेदारों को काम न देने पर बल दिया, जो काम की गुणवत्ता के साथ समझौता करते हैं और परियोजनाओं में अनावश्यक देरी करते हैं। उन्होंने वित्त वर्ष के अन्त में धनराशि को वापिस करने के बजाए बजट का समय पर उपयोग करने के निर्देश दिए। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की आवश्यकता है और पर्याप्त बजट प्रावधान के साथ पहले से ही स्वीकृत परियोजनाओं पर किस प्रकार कार्य किया जाए, इस बारे जानने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने भाजपा के 'दृष्टि पत्र' को सरकारी दस्तावेज के रूप में अपनाया है और समयबद्ध समग्र विकास को हासिल करने के लिए हमें लक्ष्यों तथा नीतिगत ढांचे पर कार्य करने की आवश्यकता है। बैठक में नूरपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक राकेश पठानिया ने पड़ोसी राज्य पंजाब से बजरी की आपूर्ति को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि क्योंकि सरकार ने अन्तरराज्यीय सीमावर्ती क्षेत्र नूरपुर में अवैध खनन के विरूद्ध कार्रवाही की है और पड़ोसी राज्य पंजाब से बजरी का अवैध भंडार 2500 रुपये से 3000 रुपये प्रति ट्रैक्टर ट्रॉली बेची जा रही है और इस प्रकार विकास कार्य करने में दिक्कत आ रही है। उन्होंने कहा कि उन लोगों के विरूद्ध कार्रवाही की जानी चाहिए, जिन्होंने नदी के खनिजों का भण्डारण किया है और बिना किसी नियंत्रण से इसकी आपूर्ति कर रहे हैं।

उन्होंने क्षेत्र के 22 गांवों को लाभान्वित करने वाली सबसे बड़ी मध्यम सिंचाई योजना फिना सिंह के लिए वित्तीय सहायता की मांग की। उन्होंने कहा कि सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग को पानी के रिसाव को रोकने अथवा पुरानी पानी की पाईपों को बदलने की आवश्यकता है। इंदौरा की विधायक  रीता देवी ने सड़कों की दयनीय हालत तथा छौंच खड्ड के तटीकरण जो बरसात के दौरान कुछ पंचायतों के कहर पैदा करती है, के बारे में शिकायत की। उन्होंने विधानसभा क्षेत्र में पेयजल की गम्भीर कमी का सामना कर रही सात पंचायतों में पेयजल सुविधा प्रदान करने की वकालत की। उन्होंने शिक्षण तथा स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पदों को भरने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने पानी की कमी का सामना कर रही पंचायतों का सर्वेक्षण करने तथा गर्मीयों का मौसम शुरू होने से पहले इन पंचायतों के लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए। 

ज्वाली निर्वाचन सभा क्षेत्र के विधायक अर्जुन सिंह ने सिद्धाता मध्यम सिंचाई योजना के निर्माण के दौरान की गई अनियमितताओं के बारे में शिकायत की। हालांकि यह योजना जल चैनलों के उचित वितरण के बिना पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने इस सम्बन्ध में जॉंच करने के आदेश दिए और कहा कि विभाग को न केवल वितरण चैनलों पर बल्कि मुख्य नहर में भी रिसाव को रोकना सुनिश्चित करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निजी तौर पर स्थल पर जाने तथा यथा शीघ्र सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा।

विधायक ने लगभग 22 वर्ष पहले बीयर प्लांट इंडस्ट्री स्थापित करने के उद्देश्य से ली गई भूमि की जॉंच करने की मांग की, क्योंकि आज तक ऐसा कोई सयंत्र इस भूमि पर नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने नागरिक अस्पताल ज्वाली में अल्ट्रासांउड मशीन उपलब्ध करवाने तथा स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पदों को भरने का आग्रह किया। उन्होंने लम्बे समय से चले आ रहे पौंग बाधं विस्थापितों के लम्बित मुद्दे को सुलझाने का भी अनुरोध किया। 

देहरा के विधायक होशियार सिंह ने उनके विधानसभा क्षेत्र में 'स्नेक पार्कÓ की स्थापना करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि उनका निर्वाचन सभा क्षेत्र नदियां और नालों से घिरा होने के कारण यहां बहुत अधिक सांप है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में 'एंटी-वेनम प्लांट' स्थापित किया जा सकता है, जो 'एंटी-वेनमÓ बेचकर राज्य में राजस्व अर्जित करने के लिए मदद करेगा। उन्होंने उनके विधानसभा क्षेत्र में नदियों के किनारे सफारी क्षेत्र की स्थापना का सुझाव दिया, जो सैलानियों के लिए अतिरिक्त आकर्षण होगा।

ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र के विधायक  रमेश चन्द धवाला ने  ज्वालामुखी माता मन्दिर न्यास की भूमि को स्वास्थ्य तथा अन्य विभागों के लिए हस्तांतरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि लगभग 17 कनाल मन्दिर न्यास भूमि जिसका हस्तांतरण नहीं किया जा सकता, को पिछली सरकार ने अस्पताल के नाम पर हस्तांतरित कर दिया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत एक बड़ी इमारत खाली पड़ी है, जबकि अस्पताल मातृ-छाया में सरांय में चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने उपायुक्त कांगड़ा से इस मामले पर तत्काल रिपोर्ट मांगी तथा जल्द से जल्द मुख्यमंत्री कार्यालय में रिपोर्ट करने को कहा। 
 

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