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हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों से लूट प्रकरण की परतें खुलनी शुरू

Publish Date: March 07 2018 08:42:45pm

13 करोड़ रूपये तक पहुंच सकती है घपले की राशि
एमआरपी से दोगुना और पिछली बार से तीन गुना रेटों पर बेचा सामान

नाहन (उत्तम हिन्दू न्यूज़/अंजलि त्यागी) : हिमाचल प्रदेश स्टेट हैंडीक्राफ्ट एंड हैंडलूम कारपोरेशन लिम. द्वारा प्रदेश के सरकारी मॉडल स्कूलों को भेजे गए सामान के नाम पर हुए कथित घोटाले की परत दर परत खुलती जा रही है और नए-नए चौंकाने वाले तथ्य सामने आने शुरू हो चुके हैं। नई जानकारी में सामने आया है कि कारपोरेशन ने स्कूलों को जो सामान बेचा है वह एमआरपी से दोगुना और पिछली बार खरीदे गए सामान के रेटों से तीन गुणा है। अनुमान है कि 25.9 करोड़ रूपये की खरीद में लगभग 13 करोड़ रूपये का कथिततौर पर गबन हुआ है।
नई जानकारी के अनुसार, विगत सरकार के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री आदर्श विद्यालय योजना के तहत राज्य के 120 स्कूलों को विकसित करने के लिए प्रति स्कूल 21,58,273 रुपये की राशि स्वीकृत की गई। इस राशि से स्कूलों में जरूरत का आधुनिक सामान उपलब्ध करवाया जाना था। इस हिसाब से सभी 120 स्कूलों को भेजी गई राशि 25.90 करोड़ रूपये बनती है। सरकार की ओर से यह राशि शिक्षा विभाग को जारी की गई। शिक्षा विभाग ने किसी निजी संस्थान से सामान लेने की बजाय हिमाचल प्रदेश स्टेट हैंडीक्राफ्ट एंड हैंडलूम कारपोरेशन लिमटेड को यह काम सौंपा।
अब कारपोरेशन ने स्कूलों को जो सामान भेजा उसमें भ्रष्टाचार की दुर्गंध आनी शुरु हो चुकी है। जिसमें एक शटल कॉक का बॉक्स 570 रुपये की एमआरपी का भेजा गया परंतु बिल में उसका दाम पर 1150 रुपये लगाया गया। बैडमिंटन रैकेट की एमआरपी 580 रूपए दर्शाई गई जबकि बिल में दाम लगाए गए 1000 रूपए। बास्केटबॉल में एमआरपी 670 रुपये है जबकि बिल में रेट लगाए गए 938 रूपए।
सिर चकरा देने वाली बात यह है कि कारपोरेशन के बिल में लगे रेट साल 2016 में सरकारी स्कूलों को सप्लाई किए गए सामान से तीन गुना बैठते हैं।  जिस शटल कॉक का बिल में रेट 1150 रूपये दिखाया गया है साल 2016 में एक निविदा के समय तीन पार्टियों ने इसका रेट 460, 450 व 500 रुपये दिखाया। इसी तरह कारपोरेशन ने अपने बिल में बास्केटबाल का रेट 938 रुपये दिखाया है जो साल 2016 में इन्हीं पार्टियों ने 540, 450 और 500 रूपये में सप्लाई करने का निविदा में आवेदन किया था। बैडमिंटन रैकेट को लेकर कारपोरेशन ने स्कूलों को 1000 रूपये का बिल भेजा है। इसी रैकेट को विगत साल तीन पार्टियों ने 270, 250 और 350 रूपये में भेजने का प्रस्ताव किया था। इन्हीं तथ्यों से अनुमान लगाया जा सकता है कि देवभूमि के भ्रष्टाचार के दानवों ने किस प्रकार तांडव किया है।
नाहन के लड़कों के स्कूल के डीपी विवेकपाल सिंह ने 'उत्तम हिंदूÓ की खबर को पढ़कर संपर्क साधा व कुछ ऐसे तथ्य बताए जिससे घोटाले में स्कूलों के प्रबधकों के शामिल होने की संभावनाओं को बल मिलने लगा है। उन्होने बताया कि सामान खरीद फरोख्त में जो प्रक्रिया अपनाई गई वह पूरी तरह से गलत है। पहले तो बिना किसी निविदा मंगवाए एक सरकारी एंजसी को टेंडर दे दिया जो अपने ही रेट लगा रही है। जबकि पहले कोई भी सामान मंगवाया जाता था तो टेंडर प्रकाशित कर कुटेशन मंगवाई जाती थी उसके बाद ही टेंडर दिया जाता था। उन्होने बताया कि पिछले साल वर्ष 2016-17 के दौरान जब स्पोर्ट्स का सामान खरीदा गया था बकायदा तीन कुटेशन मंगवाए गए थे। उसके बाद ही सबसे कम रेट पर सामान देने वाले का चयन किया गया था। पंरतु इस बार करोड़ों रूपए का सामान बिना कुटेशन मंगवाए एक ऐजेंसी को दे दिया गया। उन्होने बताया कि जब रिक्वायरमेंट भेजी गई उस दौरान भी डीपी से जानकारी नही ली गई न ही कोई सूचना दी गई। उन्होने कहा कि स्पोर्ट्स से जुड़े सामान की पुख्ता जानकारी डीपी को अधिक होती है, तो कैसे बिना कोई सूचना दिए सामान मंगवा लिया गया और बिना सामान की गुणवत्ता जांच किए उसे स्वीकार भी कर लिया गया। 

जांच में दोषी पाए किसी अधिकारी व सप्लायर को बख्शेंगे नहीें : सुरेश महाजन
मैनेजिंग डायरेक्टर ने भी 3 दिन में रिपोर्ट तलब की

हिमाचल प्रदेश के सरकारी मॉडल स्कूलों के लिए हैंडीक्राफ्ट एंड हैंडलूम कारपोरेशन द्वारा खेल उपकरण खरीद मामले में हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने जांच के आदेश दे दिए। भारद्वाज ने उत्तम हिन्दू की प्रकाशित ख़बर का संज्ञान लेते हुए कहा कि यह मामला निश्चित तौर पर पूर्व कांग्रेस सरकार के समय का है। ख़बर से पूर्व उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी लेकिन अब उच्च शिक्षा निदेशक को मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। यदि निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर उपकरण खरीदे गए हैं तो निश्चित तौर पर ये सरकारी धन का दुरुपयोग है। मामले की निष्पक्ष जांच होगी और जो भी अधिकारी कर्मचारी दोषी पाया गया तो उस पर सरकार सख्त एक्शन लेगी।
दूसरी तरफ कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक ने भी इसकी जांच के आदेश दिए हैं। प्रबंध निदेशक राकेश शर्मा ने इस मामले में 'उत्तम हिन्दूÓ की खबर का संज्ञान लेते हुए कारपोरेशन के कैम्पस इंचार्ज पांवटा साहिब को 3 दिन में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। गौर हो कि 'उत्तम हिन्दूÓ ने बुधवार के अंक में प्रदेश के स्कूलों में हो रही इस लूट की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद कारपोरेशन के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। निचले स्तर से लेकर ऊपर के स्तर के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। हो भी क्यों न, क्योंकि जिस तरह की बंदरबांट कर सरकारी धन का कथिततौर पर घपला किया गया है वह हर किसी को चौंका सकता है। शिक्षा विभाग ने कारपोरेशन के माध्यम से करोड़ों रुपये के खेल उपकरण और फर्नीचर खरीदने के लिए कारपोरेशन को अधिकृत किया लेकिन कारपोरेशन ने जिस तरह से यह सामान खरीदा उससे सामान की गुणवत्ता के साथ ही सरकारी तंत्र पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। खुले बाजार में कोई भी उत्पाद खुदरा अंकित मूल्य से अधिक कोई भी व्यापारी किसी भी हाल में नहीं बेच सकता लेकिन कायदे कानून को ठेंगे पर रख कर हैंडलूम कारपोरेशन ने वही सामान करीब दोगुने दाम पर बेचा है। इस मामले में कारपोरेशन पर लापरवाही और बंदरबांट की आशंका जताई जा रही है अन्यथा यह कैसे संभव हो सकता है कि करोड़ों का सामान बिना जांच पड़ताल और तथ्यों को जांचे बिना ही स्कूलों को भेजा जाए। 
प्रबंध निदेशक राकेश शर्मा ने भी माना कि टेंडर के जरिये भी सबसे कम दाम दर्शाने वाले को ही सामान उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी होती है, लेकिन वह किसी भी सूरत में खुदरा अंकित मूल्य से अधिक नहीं हो सकती। प्रबंध निदेशक ने हाल ही में पदभार संभाल है। अब इस मामले की पूर्ण टेंडरिंग प्रक्रिया को देख जाएगा और दोषियों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि गड़बड़ी पाई गई तो निश्चित तौर पर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। 

शिक्षा विभाग ने भी पत्र लिख कर चेताया, रुक सकता है भुगतान
कथित घोटाला जैसे ही उजागर हुआ उसके तुरंत बाद ही मामले को लेकर शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। जिसमें मामले की जांच को लेकर जिला उच्च शिक्षा उपनिदेशक द्वारा सभी चयनित दस आदर्श स्कूलों में निर्देश दिए गए कि सभी स्कूलों में सामान की गुणवत्ता जांचने के लिए एक कैमेटी गठित की जाए तथा एमआरपी से अधिक बिल के सामान को स्वीकार नही किया जाए। साथ ही निर्देश भी दिए कि जांच कमेटी द्वारा ये सुनिश्चित किया जाए कि जारी किया गया सामान पूर्व में विवरण एवं डिजाईन के अनुसार ही प्राप्त हो रहा है। इसके अलावा उत्तम हिंदू से बात करते हुए शिक्षा उपनिदेशक सिरमौर सुधाकर शर्मा ने बताया कि ये एक गंभीर विषय है जिस पर जांच के आदेश कर दिए गए हैं। यदि सामान एमआरपी से अधिक रेट पर पाया गया तो उसका भुगतान रोका जाएगा और उक्त सप्लायर्स का टेंडर भी रद्द किया जा सकता है। इतना ही नही मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें एफआईआर भी दर्ज करवाई जा सकती है।
मामले की कुछ दिन पहले उच्चाधिकारियों को की गई थी शिकायत 
ऐसा नहीं कि सरकार इस कथित घोटाले के प्रति अनभिज्ञ थी। निशिकांत नामक व्यक्ति ने 23 फरवरी, 2018 को राज्य के प्रमुख सचिव (उद्योग), निदेशक (उद्योग विभाग) व उद्योग विभाग के नियंत्रक को इसकी शिकायत कर आशंका जताई थी कि स्कूलों में भेजा जा रहा सामान न केवल कथिततौर पर निम्न क्वालिटी का है बल्कि महंगा भी है। जांच का विषय है इस शिकायत पर किस अधिकारी ने कुंडली मारी और कार्रवाई करने की जरूरत नहीं समझी।
 

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