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स्कूलों से लूट प्रकरण मामले, सिरमौर उच्च शिक्षा विभाग की जांच टीम ने त्रिलोकपुर स्कूल का किया दौरा

Publish Date: March 13 2018 08:52:53pm

नाहन (अंजलि त्यागी):  जिला सिरमौर के आर्दश स्कूलों को खेल का सामान/फर्नीचर वितरण करने में हुई गड़बड़ी की जांच को लेकर जिला उच्च शिक्षा विभाग की टीम मंगलवार को मॉडल स्कूल त्रिलोकपुर पहुची। दो सदस्यों की इस टीम में प्रिंसीपल यशपाल व सुप्रीटेंडेंट संदीप वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पुरूवाला पांवटा साहिब सिरमौर शामिल रहे। जानकारी देते हुए प्रिंसीपल यशपाल ने बताया कि उच्च शिक्षा निदेशक सिरमौर द्वारा उन्हे त्रिलोकपुर मॉडल स्कूल में जांच के आदेश दिए गए थे। इस दौरान उन्होने मंगलवार को मॉडल स्कूल त्रिलोकपुर में गहनता से निरिक्षण किया व सामान की बारीकी से जांच की। उन्होने बताया कि अधिकांश सामान पर मूल्य का विवरण अङ्क्षकत नही था, मात्र कुछ ही सामान पर मूल्य व कंपनी का नाम अकिंत पाया गया। जिसमें रैकेट, बास्केट बॉल व शटल कॉक को छोडकर अधितर सामान बिना एमआरपी का था। उन्होने बताया कि इस दौरान पीटीआई शिक्षक व डीपीई स्कूल के लिखित बयान भी रिकॉर्ड के तौर पर सुरक्षित किए गए है। साथ ही डीडीओ एंव प्रिंसीपल त्रिलोकपुर स्कूल के बयान भी लिए गए है। फिलहाल स्कूल से सामान की ऑडर कॉपी, सामान का बिल, प्रिंसीपल आर्डर बुक डिमांड रजिस्टर की फोटो कॉपी सहित केमेटी के गठन से संबधित दस्तावेज भी एकत्र किए गए। उन्होंने बताया कि अभी सभी दस्तावेजो को बारीकी से जांचा जाएगा उसके बाद ही रिर्पोट तैयार की जाएगी। एमआरपी से अधिक बेचे गए सामान के सवाल पर उन्होने कहा कि अभी उन्होने बिलों को टेली नही किया है।
गौर रहे कि जिला सिरमौर में आर्दश स्कूल बनाने के लिए करीब 10 स्कूलों में खेल का सामान व फर्नीचर खरीदने के मामले में काफी बड़े स्तर पर घपला होने का आदेश सामने आया जिसको उत्तम हिन्दू समाचार पत्र में प्रमुखता से छापा गया। जिसके बाद शिक्षा विभाग ने प्रदेश स्तर व जिला स्तर पर जांच की आदेश दिए जिसके तहत मंगलवार को सिरमौर के त्रिलोकपुर स्कूल में जांच प्रक्रिया अमल में लाई गई। अब देखना ये है कि जांच में दोषी पाए गए लोगो के खिलाफ विभाग क्या सजा मुकरर करता है।

क्या कहते है स्कूल की डीपीई
वही दूसरी तरफ त्रिलोकपुर मॉडल स्कूल की डीपीई सीमा ने बताया कि 27 जनवरी को सामान स्कूल में पहुचा था तथा जितना भी सामान में अंतर पाया गया उसके बारे में उन्होंने प्रिंसीपल को बता दिया था, जिसके कारण तकनीकि रूप से उस सामान को स्टॉक बुक में नही चढ़ाया जा सकता था। उन्होने 16 फरवरी तक सामान को स्टाक बुक में नही लिखा था परंतु इस दौरान डीडीओं द्वारा उन्हे लगातार सामान का ब्यौरा बुक में लिखने के लिए दबाव बनाया जाता रहा। एक बार तो उन्होने चेताया कि यदि सामान को जल्दी ही स्टॉक बुक में नही चढाया गया तो उनके ऊपर निदेशक लेवल की इंक्वारी करवाई जाएगी। पंरतु उन्होने सामान नही चढ़ाया। इसके बाद डीडीओं ने ऑडर बुक पर उन्हे लिखित ऑडर दिया जिसके बाद उन्हे स्टॉक बुक में सामान का ब्यौरा लिखा।

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