Monday, July 16,2018     ई पेपर
ब्रेकिंग न्यूज़
हिमाचल प्रदेश

रो पड़ी हिमाचल की वादियां, बस हादसे में मारे गए बच्चों की जली चितायें, कुछ को दफनाया

Publish Date: April 11 2018 01:15:52pm

धर्मशाला/ विजयेन्दर शर्मा: कागड़ा जिले के नूरपुर के पास मलकवाल-ठेहड़ लिंक रोड पर चेली गांव में हुए दर्दनाक बस हादसे में वजीर राम सिंह पठानिया मेमोरियल स्कूल के बच्चों का सामूहिक अंतिम संस्कार कर दिया गया। उम्र कम होने की वजह से उन्हें दफनाया गया। जो कुछ की चितायें जलीं।  

सिविल अस्पताल में प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर व केन्द्रिय मंत्री जेपी नड्डा की ओर से मारे गये बच्चों को श्रद्धांजलि देने के साथ ही बच्चों को परिजनो को सौंपने का सिलसिला शुरू हुआ, तो चीख पुकार में हर आंख नम हो गई। सैंकड़ों की तादाद में यहां सुबह से ही लोग जुटे थे। मातम के महौल में चारों ओर आंसूओ का ही सैलाब था। कुछ ऐसे परिवार थे, जिनके घर के सारे चिराग आज बुझ गये थे तो कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने बड़ी मन्नतों के बाद पीर फकीरों के आर्शीवाद से अपने घर में किलकारियां सुनी थीं। उन्हें ही आज अपने लाडलों को कंधा देना पड़ रहा था। अस्पताल से शव ले जाने के बाद  शव जब घरों में पहुंचे, तो एक बार फिर महौल मातमी हो गया। घरों से बच्चों के जनाजे उठते ही हर रूह कांप गई। शव यात्रा में भी महौल दर्दनाक था। 

बस हादसे में सबसे ज्यादा जानेंं गंवाने वाले ख्वाड़ा गांव में एक साथ 12 बच्चों की चिताएं जली। ख्वाड़ा गांव से ही भविष्य जम्बाल सुपुत्र राधव जम्बाल, हर्ष पठानिया सुपुत्र राधव सिंह, परमीश ठाकुर पुत्र रघुनाथ निवासी, स्नेहा सुपुत्री अजय सिंह, पलक जम्बाल सुपुत्री राजेश सिंह, प्रणव सुपुत्र कर्म सिंह निवासी ख्वाड़ा, जानवी और कार्तिक कटोच सुपुत्र सुरजीत कटोच शामिल हैं। वहीं बाकी बच्चों को दफनाया गया। नुरपूर के यह दर्दनाक हादसा अपने जिगर के टुकड़ों को खोने के दर्द परिवार वालों को ताउम्र नहीं भूलेगा। लेकिन यह सवाल भी देर तक सताएगा कि आखिर इन मासूमों की मौतों का जिम्मेदार कौन है स्कूली बच्चों के साथ अब तक का यह सबसे बड़ा हादसा हिमाचल के शासन और प्रशासन के सामने ऐसे कई सवाल खड़े करता है, जिनका जवाब ढूंढना जरूरी है। ताकि कल कोई और बेमौत न मारा जाए। अगर सडक़ हादसों के लहाज से देखें तो हिमाचल में यह पहला मामला नहीं है। हर रोज प्रदेश की सडक़ें औसतन तीन लोगों का जीवन निगल जाती हैं। तो या इन मासूम फूलों को भी सडक़ों की दुर्दशा लील गई। 

जिस जगह बस गिरी वहां एक तरफ खुली खाई है। ऐसी जगहों पर क्रैश बैरियर लगाने की योजना है। लेकिन उस जगह पर नहीं था..क्यों..? यह पहला सवाल है, अगर क्रैश बैरियर लगा होता तो शायद आज मासूमों की जान बच जाती और यह हादसा उतना भयंकर न होता। आमतौर पर स्कूल सैकेंड हैंड बसें खरीदते हैंं। अधिकांश बसों की हालत सही नहीं होती। उनमें स्पीड गवर्नर नहीं होते, जो कि जरूरी हैं तो या बच्चों की सुरक्षा के साथ समझौता करके उनमें बच्चे ढोए जाते हैं। ऐसी सूचना आ रही है कि बस चालक मदन लाल स्वास्थ्य के लिहाज़ से फिट नहीं था। उसे दो बार दिल का दौरा भी पड़ चुका था।

Image may contain: one or more people and food

Image may contain: mountain, outdoor and nature

Image may contain: 4 people

Image may contain: one or more people, people standing, outdoor and food

Image may contain: outdoor

WhatsApp पर न्यूज़ Updates पाने के लिए हमारे नंबर 9814266688 को अपने Mobile में Save करके इस नंबर पर Missed Call करें ।


फाइनल मैच में दखलअंदाजी की पुसी रायट ने ली जिम्मेदारी

मॉस्को (उत्तम हिन्दू न्यूज): फीफा विश्व कप के फाइनल मैच के दौरान मैदान में घुस आए कुछ लोगो...

सरकार व पुलिस की आलोचना के आरोप में तमिल अभिनेत्री गिरफ्तार

चेन्नई (उत्तम हिन्दू न्यूज) : तूतीकोरिन हिंसा को लेकर तमिलनाड...

top