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खदानों की नीलामी में देरी पर हाईकोर्ट नाराज, जांच के आदेश

Publish Date: September 07 2018 08:38:52pm

शिमला (ऊषा शर्मा) : प्रदेश हाईकोर्ट ने खदानों के चिन्हित करने व उनकी नीलामी में देरी करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों की पहचान करने व देरी के कारणों की जांच करने के लिए मुख्य सचिव को व्यक्तिगत तौर पर जांच करने के आदेश दिए है। अदालत ने मुख्य सचिव को आगाह किया है कि जांच के दौरान वह वेबजह किसी भी अधिकारी व कर्मचारी को बचाने की कोशिश न करे व जांच निष्पक्ष व सही तरीके से करे। न्यायमूर्ति तरलोक चौहान और न्यायमूर्ति चंद्र भूषण बारोवालिया की खंडपीठ ने मुख्य सचिव को यह जांच 28 सितंबर से पहले पूरी कर 28 सिंतबर को जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करने के आदेश दिए है।

खंडपीठ ने यह आदेश जिला ऊना के अंब के गांव ढांडरी, शिव नगर और टकराला के ग्रामीणों की ओर से दायर याचिका की सुनवाई  के बाद दिए। इन ग्रामीणों ने इल्जाम लगाया था कि अंधाधुंध खुदाई होने से ऊना में घामी खडड में पानी का स्तर नीचे गिर गया है और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। अदलत ने टिप्पणी की कि यह राज्य व यहां की जनता अधिकारियों व कर्मचारियों के ढुलमुल रवैये की सजा कब तक झेलती रहेगी। जनहित सबसे बड़ा कानून है,इन अधिकारियों ने इसे कभी का  अलविदा कह दिया है। अदालत ने कहा कि प्रदेश में 44400 हेक्टैयर जमीन पर खनिज हैं इनमें से केवल 2350 हेक्टैयर में से खनिजों का दोहन हो रहा है । यह केवल पांच फीसद है। खंडपीठ ने कहा कि पिछली सुनवाई पर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव उद्योग और राज्य भूगर्भविज्ञानी की ओर से अदालत को भरोसा दिया गया था कि सभी नदियों के किनारों पर स्थित खदानों का पूर्ण दोहन किया जाएगा। लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि नदियों के किनारों पर पड़ें खनिज पानी के साथ बहकर पड़ोसी राज्यों में जा रहे। इससे राज्य की आय को भारी नुकसान हो रहा है। खंडपीठ ने कहा कि 15 जनवरी 2016 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने जिला सर्वे रिपोर्ट तैयार करने की अधिसूचनाजारी की थी। आज अढाई साल बाद भी ये काम पूरा नहीं हो पाया और सरकार ने अब तक जो काम किए है, उन्हें न्यायोचित ठहराने की कोशिश कर रही है। यही नहीं जब गैर कानूनी तरीके से खदानों से खनिज ले जाया जा रहे हैं तो ऐसे में कोई नीलामी में क्यों आना चाहेगा व जवाबदेह क्यों बनेगा। यह सब अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत व लापरवाही  की वजह से हो रहा है।

कांगड़ा, सिरमौर, ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, कुल्लू व मंडी में पहले व दूसरे चरण में कुल 132 खदानें नीलाम की गई है। जबकि लाहुल स्पिति, किन्नौर,चंबा व शिमला में जिला सर्वे रिपोर्टें अभी तैयार ही की जा रही है। खंडपीठ ने कहा कि जो खदानें 2015 -16 में नीलाम हो गई थी उन्हीं को ब्योरा देकर अपनी पीठ थपथापाने की कोशिश कर रही है। इसके बाद स्टोन क्रशरों व खदानों को लीज पर देने के जरा सी बढ़ोतरी हुई है। खंडपीठ ने कहा कि सरकार ने अदालत में शपथपत्र दिया था कि वह जल्द खदानों की नीलामी कर देगी । लेकिन ऐसा नहीं हो पाया । ऐसे में सरकार को पहले अपना घर ठीक करना होगा। शपथपत्र के मुताबिक कोई भी बोलीदाता ने नीलामी मे भाग नहीं ले रहा है। इसका जवाब यह है कि जब बिना नीलामी के खदानों से माल उठ रहा है तो नीलामी में भाग लेने कीक्या जरूरत है। मुख्य सचिव विनीत चौधरी इस महीने की आखिरी तारीख को रिटायर हो रहे है। उन्हें यह जांच उससे पहले अदालत को सौंपनी होगी।

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