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महाराष्ट्र के किसानों का सरकार के साथ समझौता, आश्वासन के बाद आन्दोलन वापस

Publish Date: March 12 2018 07:37:42pm

मुंबई (उत्तम हिन्दू न्यूज) : अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में नासिक से निकला आक्रोशित किसानों का जत्था मुंबई के आजाद मैदान से आज यानी सोमवार को ही वापस चला जाएगा। दरअसल, किसान नेताओं की सरकार के साथ वार्ता होने के बाद किसान आन्दोलन को फिलहाल वापस ले लिया गया है। हालांकि किसान नेताओं की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन सरकारी मीडिया के द्वारा प्रसारित खबर में बताया गया है कि किसानों के अधिकतर मांग मान लिए गए हैं और अब आन्दोलन का कोई औचित्य नहीं है। 

बता दूं कि पूर्ण कर्जमाफी जैसी मांगों को लेकर नासिक के लगभग 40,000 किसान, करीब 200 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद मुंबई पहुंचे थे। उनको वापस नासिक भेजने के लिए भारतीय रेलवे ने दो विशेष रेल गाड़ी की व्यवस्था की है। इसी गाड़ी से किसान वापस नासिक जाएंगे। नाराज किसानों ने आज विधानसभा का घेराव करने का ऐलान किया था लेकिन फडणवीस सरकार के लिखित आश्वासन देने के बाद किसान नेताओं ने आन्दोलन वापस कर दिया। लिहाजा इस किसान मार्च ने देश के साम्यवादी आन्दोलन की धारा बदल दी है। 

इस मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने किसानों को लिखित आश्वासन दिया है और कहा है कि किसानों के मामले को 6 महीने में सुलझा लिया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी किया जिसमें उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों के लिए बातचीत कर रहे हैं और किसानों की समस्या जायज जिसे जल्द सुलझाने का प्रयास किया जाएगा। इस मुद्दे पर महाराष्ट्र के सिंचाई मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि किसानों के साथ बैठक हुई है। सभी बातों पर चर्चा हुई,  किसान खुश हैं, स्वयं उनके नेता आंदोलन को खत्म करने का ऐलान करेंगे.

सरकारी सूत्रों में बताया गया है कि आन्दोलन कर रहे किसान नेताओं के साथ 12-13 विषयों पर चर्चा हुई। कोई ऐसा मुद्दा या विषय नहीं रहा, जिसके कारण आंदोलन चले। बताया गया है कि सरकार और किसान नेताओं के बीच कुल तीन घंटे तक की वार्ता हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री फडणवीस और किसानों के बीच सहमति बन गयी और किसानों ने आन्दोलन वापस लेने की बात कही। 

पूर्ण कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करवाने के लिए 40,000 से अधिक किसान मुंबई पहुंचे हैं। खबरों में बताया गया है कि किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की है। हालांकि अभी तक मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता को किसान संगठन के नेताओं ने सार्वजनिक नहीं किया है लेकिन इतना साफ हो गया है कि किसानों की मुकम्मल मांग को मानने के लिए फिलहाल सरक ार तैयार हो गयी है।  

नासिक से 180 किलोमीटर का पैदल मार्च करते हुए 6 दिनों के बाद किसानों का समूह रविवार देर रात मुंबई के आजाद मैदान पहुंचा है। किसानों का मानना है कि सरकार उनके विकास के लिए प्रभावी नीतियां बनाने में असफल रही है। किसानों का कहना है कि सरकार को हाईवे और बुलेट ट्रेन जैसे विकास कार्यों के नाम पर किसानों की जमीन हड़पना बंद करना चाहिए।

इस बीच किसानों को अन्य दलों का राजनीतिक समर्थन मिलता दिख रहा है। रविवार को जहां शिवनेसा प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने किसानों से मुलाकात कर उन्हें अपना समर्थन दिया। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। हालांकि यह पहली बार नहीं जब राज्य के किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। इससे पहले भी किसानों ने राज्य में कर्ज माफी को लेकर आंदोलन चलाया था लेकिन तब राज्य सरकार ने किसानों के एक लाख रुपये तक के कर्ज माफी की घोषणा की थी।

बता दूं कि महाराष्ट्र के किसानों की खेती लगभग चौपट हो चुकी है। यही कारण है कि10 महीनों में दूसरी बार राज्य सरकार के खिलाफ  किसानों ने मोर्चा खोला है। इसमें पुरुषों, महिला, युवा और बुजुर्गों सहित 40,000 से अधिक किसानों ने छह दिनों से ज्यादा समय में यात्रा कर 180 किलोमीटर लंबे मार्च को पूरा किया है।

अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) की ओर से आयोजित इस मार्च में माक्र्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के किसान धड़े के किसान लाल टोपी पहने, हाथों में लाल झंडे लिए ड्रम बजाते हुए मार्च में शामिल हुए। इस मार्च के दौरान साम्यवादी दलों के पारंपरिक आक्रामक रवैये का रुझाम साफ नगन्य है। किसानों ने छात्रों की बोड परीक्षाओं में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो इस बात को ध्यान में रखते हुए रात (सोमवार) को दो बजे ही विद्याविहार के सोमैया मैदान से ऐतिहासिक आजाद मैदान के लिए रवाना हो गए।

किसानों की सोमवार दोपहर को महाराष्ट्र विधानसभा की घेराबंदी करने की योजना को देखते हुए सरकार ने किसानों के साथ सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आनन-फानन में छह सदस्यीय मंत्रिमंडलीय समिति गठित कर दी थी। किसान नेता अजीत नवाले ने कहा कि हमारी प्रमुख मांगों में जून 2017 में घोषित हुए किसान ऋण माफी को लागू करना है, जिससे किसान पूरी तरह से कर्जमुक्त हो सकें।

नवाले ने रविवार को संवाददाताओं को बताया था कि पूरे देश से हमें मिले जबरदस्त सहयोग को देखते हुए सरकार हमें हल्के में नहीं ले सकती। अगर सरकार कृषि ऋण माफी को लेकर ढीला ढाला रवैया बरकरार रखेगी तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। एआईकेएस महाराष्ट्र के अध्यक्ष अशोक धवाले ने कहा कि कृषि की हालत गंभीर है। बीते 25 वर्षों में 400,000 से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं।

उन्होंने कहा, कृषि की खस्ता हालत कुपोषण से जुड़ी है। किसान महाराष्ट्र और केंद्र में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार द्वारा ठगे महसूस कर रहे हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चव्हाण, राधाकृष्णन विखे-पाटिल, पृथ्वीराज चव्हाण और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार, धनंजय मुंडे और जितेंद्र अवहद सहित कांग्रेस नेताओं ने किसानों के मार्च को समर्थन देने का ऐलान किया है। 

किसान नेताओं ने अगली कार्रवाई की भी घोषण अभी नहीं की है। किसान नेताओं का कहना है कि अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो वे पूरे देश भर में इसी प्रकार का आन्दोलन खड़ा करेंगे। 

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