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गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने जताई आशंका, आने वाले दिनों में बढ़ेंगे साइबर हमले

Publish Date: March 14 2018 02:34:43pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इंटरनेट पर बढ़ती निर्भरता के मद्देनजर साइबर हमलों की निरंतर बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि सभी देशों की सुरक्षा एजेंसियों को एकजुट होकर 'साइबर दुश्मनों' को हराना होगा। सिंह ने पुलिस प्रमुखों के अंतर्राष्ट्रीय संघ (आईएसीपी) के दो दिवसीय एशिया प्रशांत क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए आज यहां कहा कि इंटरनेट संचार और संपर्क का सबसे अनुकूल माहौल बन गया है। यह वित्तीय लेन - देन और सामाजिक गतिविधियों की रीढ़ के रूप में उभरा है तथा सरकार और लोगों के बीच सेतु का काम कर रहा है। इंटरनेट की बढ़ती पहुंच को देखते हुए दुनिया भर में सरकारों ने डिजिटल कार्यक्रम शुरू किये हैं। देश में भी सरकार ने अनेक क्षेत्रों में डिजिटल आधारित सेवाएं शुरू कर डिजिटलिकरण को नया आयाम दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में तेजी से बदल रही प्रौद्योगिकी के दौर में कम्पयूटर और इंटरनेट पर निर्भरता बढ़ी है। कम्पयूटर आधारित प्रौद्योगिकी का साधारण सुरक्षा प्रणाली से लेकर परमाणु संयंत्रों तथा अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल बढ़ रहा है जिससे साइबर निर्भरता भी बढ़ी है। इसे देखते हुए नागरिक और सैन्य दोनों क्षेत्रों की आधारभूत संरचनाओं पर साइबर हमलों की आशंका तथा खतरा बढ गया है। उन्होंने कहा कि इस खतरे से निपटने के लिए दुनिया भर की सुरक्षा एजेन्सियों को परस्पर सहयोग बढाकर एकजुट होना होगा जिससे 'साइबर दुश्मनों' को हराया जा सके। 
सिंह ने कहा कि उन्हें आशंका है कि साइबर हमलों का खतरा और बढ़ेगा क्योंकि आने वाले दशकों में इन हमलों में इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों में भी निरंतर सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि नेटवर्क में बाधा, हैकरों द्वारा आंकड़ों के साथ खिलवाड़ और साइबर संबंधित घटनाओं तथा अपराधों ने मानव जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कंप्यूटर, मोबाइल, डिजिटल एप और डाटा नेटवर्क के उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या के कारण इनके दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ रही है। 
सरकार, सैन्य बल, निगम, वित्तीय संस्थान, जनोपयोगी सेवा केन्द्र , अस्पताल और उद्योग भारी मात्रा में संवेदनशील जानकारी का इंटरनेट आधारित कंप्यूटर नेटवर्क के माध्यम से आदान-प्रदान करते हैं। बढ़ते साइबर हमलों के मद्देनजर हमें संवेदनशील जानकारी के साथ साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी पुख्ता करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वायरस, कप्यूटर हैकिंग, डाटा की चोरी, क्रेडिट कार्ड की जानकारी हासिल करना ये सबसे खतरनाक और गंभीर साइबर अपराध है लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि आप कितनी भी सावधानी और एहतियात बरतें इनसे बचाव की 100 प्रतिशत गारंटी नहीं दी जा सकती। हां इन्हें कम करने के लिए कदम जरूर उठाये जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध एक तरह का उद्योग बन गया है और अनेक साइबर संबंधी टूल तथा तकनीक सेवाओं के तौर पर मुहैया कराई जा रही हैं। यहां तक कि नौसिखिया अपराधी भी कम निवेश कर इन सेवाओं का लाभ उठा सकता है। वित्तीय सेवाओं में इंटरनेट के बढ़ते उपयोग और कमजोर निगरानी प्रणाली के चलते धोखेबाजों की नयी पौध सामने आई है जो इन कमियों का फायदा उठा रहे हैं। 

कैशलेस लेन देन और ऑनलाइन सेवाओं के बढते उपयोग से भी साइबर दुश्मनों को फायदा हो रहा है। इससे निपटने के लिए बैंकिंग सेक्टर में पुख्ता साफ्टवायर विकसित किये जाने तथा मौजूदा खामियों को दूर करने की जरूरत है। 
उन्होंने कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स , वर्चुअल मुद्रा, उन्नत मालवेयर , कृत्रिम बौद्धिकता जैसी नयी प्रौद्योगिकी तेजी से अपने पैर पसार रही है। सुरक्षा एजेन्सियों को इनसे निपटने के लिए खासी मशक्कत करनी होगी। कुछ देशों में साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए डार्कनेट , प्रोक्सी सर्वर और ऑनियन राऊटर जैसी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्रिप्टो करेंसी और सोशल मीडिया के दुरूपयोग ने अपराधियों का ऐसा गिरोह तैयार कर दिया है जिसने दुनिया भर में हाथ मिला रखे हैं। 
 

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