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गुजरात विधानसभा से कांग्रेस के तीन विधायक निलंबित, सदन में बेल्ट से मारपीट करने का है आरोप 

Publish Date: March 14 2018 06:52:14pm

गांधीनगर (उत्तम हिन्दू न्यूज) : गुजरात विधानसभा में बुधवार को हंगामे, गाली गलौज और माइक तोड़ कर हमले का प्रयास करने के मामले में विधानसभा अध्यक्ष राजेन्द्र त्रिवेदी ने मुख्य विपक्षी कांग्रेस के तीन विधायक, प्रदीप दुधात, अमरीश डेर और बलदेव ठाकोर को विधानसभा से निलंबित कर दिया है। विधानसभा सूत्रों से मिली खबर में बताया गया है कि गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष ने प्रताप दुधात व अमरीश डेर को तीन साल के लिए विधानसभा से निलंबित किया है जबकि कांग्रेसी विधायक बलदेव ठाकोर को एक साल के लिए निलंबित किया गया है। 

इन तीनों विधायकों के सजा की अवधि के दौरान विधानसभा और उसके परिसर में आने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। उपमुख्यमंत्री नीतिन पटेल ने भाजपा विधायक जगदीश पांचाल पर माइक से हमले का प्रयास करने वाले कांग्रेस विधायक प्रदीप दुधात (पहले ही शेष बजट सत्र यानी 28 मार्च तक के लिए निलंबित) और विधानसभा अध्यक्ष के आसन की ओर अपशब्दों का उच्चारण करते हुए दौडऩे वाले कांग्रेस विधायक अंबरीश डेर (दिन भर के लिए निलंबित) को तीन-तीन साल तथा बाद में भाजपा विधायकों को कथित तौर पर धमकी देने वाले कांग्रेस विधायक बलदेवजी ठाकोर को एक साल के लिए सदन से निलंबित करने की मांग करने वाला एक प्रस्ताव सदन में रखा। जिसे श्री त्रिवेदी ने मंजूर कर लिया। 

उन्होंने कहा कि सत्तापक्ष सजा मांगने में उदार है क्योंकि वह स्वयं पांच साल के निलंबन के पक्ष में थे। इस निर्णय के विरोध में कांग्रेस ने सदन से बर्हिगमन (वाक आउट) कर दिया। कांग्रेस का कहना था कि श्री दुधात से गाली गलौज करने और कांग्रेस विधायकों को धमकी देने वाले भाजपा विधायक जगदीश पांचाल और हर्ष संघवी को भी तीन तीन साल के लिए निलंबित किया जाना चाहिए। पांचाल ने कहा कि अगर कांग्रेस यह साबित कर दे कि उन्होंने गाली गलौज की है तो वह सदन से त्यागपत्र दे देंगे।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक जीतू वाघाणी ने कहा कि ऐसा कलंकित करने वाले बताज़्व के लिए वह समग्र रूप से कांग्रेस को दोषी मानते हैं। वह विधायकों को निलंबित करने तथा हर तरह की विधायी कायज़्वाही और समितियों से दूर रखने के अध्यक्ष के निणज़्य के लिए उनके आभारी है। उधर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तथा पूवज़् केंद्रीय मंत्री भरतसिंह सोलंकी ने इस फैसले को अलोकतांत्रिक करार दिया। 

ज्ञातव्य है कि प्रश्नोत्तर काल के दौरान जब स्वयंभू संत आसाराम बापू के आश्रम में कई वर्ष पूर्व दो बालकों की कथित बलि के मामले की जांच रिपोर्ट को सदन पटल पर रखने से जुड़ा एक प्रश्न दुधात ने उठाया था तभी नीतिन पटेल ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया। इस दौरान कांग्रेस विधायक विक्रम माडम ने अध्यक्ष से कुछ कहना चाहा। इसी बीच शोर शराबे के साथ डेर ने अध्यक्ष पर आरोप लगाना शुरू कर दिया। तभी दुधात ने मेज से माइक उखाड़ ली और पांचाल पर हमले का प्रयास किया हालांकि उन्हें चोट नहीं आयी। 
 

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