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बाबरी मस्जिद पर सैयद वसीम रिजवी का बड़ा खुलासा 

Publish Date: March 16 2018 05:27:59pm

लखनऊ (उत्तम हिन्दू न्यूज) : विवादित रामजन्मभूमि मामले में पक्षकार होने का दावा करने वाले उत्तर प्रदेश शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजवी ने आज कहा कि इस्लाम के अनुसार राम जन्मभूमि पर बनायी गयी बाबरी मस्जिद पर नमाज न कभी जायज थी और न ही कभी हो पायेगी। रिजवी ने आज यहां जारी बयान में दावा किया कि रामजन्मभूमि मसले पर उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी पक्षकारों की सूची में उत्तर प्रदेश सेंट्रल वक्फ बोर्ड का नाम 50वें नम्बर पर है जबकि सुन्नी पक्षकार यह भ्रम फैला रहे है कि उत्तर प्रदेश शिया सेण्ट्रल वक्फ बोडज़् का पक्ष खारिज कर दिया गया है, जो कि गलत है। 

उन्होने कहा कि बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष हिन्दू पक्षकारों से समझौता कर अपनी बात रखते हुए कहा है कि वषज़् 1528 में राम जन्मभूमि पर विवादित मस्जिद मीर बाकी द्वारा बनाई गई थी और वह शिया मुसलमान था। इसलिए सुन्नी मुसलमानों से उक्त मस्जिद का कोई सम्बन्ध नही है। वक्फ बोर्ड को इस सम्बन्ध में महत्वपूणज़्कागज़ात भी प्राप्त हुए है, जिन्हें बोडज़् उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान प्रस्तुत करेगा। 

रिजवी ने कहा कि बोर्ड को उम्मीद है कि न्यायालय राम जन्मभूमि पर बने विवादित ढांचे के सम्बन्ध में उसे असली पक्षकार मानते हुए बोर्ड के प्रस्ताव पर विचार करेगा जिसमें कहा गया है कि राम जन्मभूमि स्थल पर मीर बाकीद्वारा बनाए गए विवादित ढांचे से बोर्ड अपना अधिकार समाप्त करते हुए हिन्दू समुदाय को पूर्ण अधिकार देता है कि वह राम जन्म भूमि स्थल पर भव्य राम मन्दिर बनवा ले और शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ में एक मस्जिदे अमन बनवा लेगा, क्योंकि इस्लामिक सिद्धान्तों के अनुसार किसी विवादित जगह पर या किसी कब्ज़ाई हुई भूमि पर नमाज़ नही पढी जा सकती।

उत्तर प्रदेश शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड ने इस सम्बन्ध में ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को पत्र लिखते हुए कहा गया है कि नमाज़ के सम्बन्ध में इस्लामिक सिद्धान्तों के अनुसार अपनी जि़म्मेदारी निभाए, वह उन समस्त विवादित मस्जिदों जिन्हें मुस्लिम शासको द्वारा मन्दिरों को तोड़ कर बनाया गया है, उनमें हो रही नमाज़ें नजाएज़ है। वर्ष 1991 में जो कानून बनाया गया है कि वषज़् 1947 के बाद से बाबरी मस्जिद को छोड़ कर, जो मस्जिद मन्दिर जिस स्थिति में है, वह वैसे ही रहेंगे। 

उक्त कानून विवादित मस्जिदों की यथास्थिति बनाए रखने के लिए है, लेकिन उक्त कानून का सम्बन्ध इस्लामिक सिद्धान्तों के अनुसार नमाज़ के नियमों से नही है। इस कारण यह ऑल इण्डिया मुस्लिम पसज़्नल लॉ बोर्ड की जि़म्मेदारी है कि वह इस्लामिक सिद्धान्तों का अनुपालन सुनिश्चित कराते हुए इन सभी नौ मस्जिदों पर हो रही नमाज़ को तुरन्त बन्द कराए और मुसलमानों को गुनह से बचाए।
 

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