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चीनी रणनीति की काट के लिए भारत ने बनाया बड़ा प्लान, पड़ोसियों की सहायता राशि में बढ़ोतरी 

Publish Date: March 21 2018 07:00:15pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : भारत के पड़ोसी देशों में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी मोदी सरकार की चिंता को बढ़ा दिया है। इस मामले में नरेन्द्र मोदी की सरकार नए सिरे से रणनीति बना कर काम करने लगी है। भारत सरकार ने अप्रैल से शुरू हो रहे नए वित्त वर्ष 2018-19 के लिए कुछ देशों को दी जानेवाली वित्तीय मदद बढ़ा दी गयी है। गौरतलब है कि एक तरफ भारत मदद के जरिए पड़ोसियों से रिश्तों को मजबूत करना चाहता है तो वहीं चीन भी इस मामले में कमजोर नहीं है।  

चीन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। अपने हितों की सुरक्षा के लिए वह अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह विदेशी धरती पर सैन्य अड्डे बनाने की कोशिशों में लगा है, साथ ही वह लगभग सभी दक्षिण एशियाई देशों में प्रॉजेक्ट्स में भागीदारी कर रहा है। चीन के भारी-भरकम निवेश की चाल से निपटने के लिए भारत ने अपने पड़ोसियों को मदद बढ़ा दी है और डिवेलपमेंट प्रॉजेक्ट्स के क्रियान्वयन पर फोकस किया जा रहा है। 

सरकार की वित्तीय मदद वाली सूची में भूटान और नेपाल टॉप पर हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि नेपाल को पिछले साल की तुलना में इस बार 73त्न ज्यादा यानी 600 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी जाएगी। 2017-18 में भारत ने नेपाल को 375 करोड़ रुपये की मदद दी थी।हालांकि नेपाल अकेला देश नहीं है, जिसे भारत ने मदद बढ़ाई है। भूटान पहले की तरह सबसे ज्यादा मदद पानेवाला देश होगा, उसे 1,813 करोड़ रुपये आवंटित किए गए है। दरअसल, यह हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रॉजेक्ट्स व अन्य कायोज़्ं के लिए रॉयल गवर्नमेंट को दी जानेवाली मदद का हिस्सा है। 

पिछले हफ्ते विदेश मामलों पर एक संसदीय समिति की रिपोर्ट में बताया गया कि चीन हमारे पड़ोस में बड़ी तेजी से ढांचागत विकास की परियोजनाओं में अपना दखल बढ़ा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की इस रणनीति को काउंटर करने के लिए सरकार अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार भूटान और नेपाल में विकास संबंधी साझेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें बताया गया कि 2018-19 के लिए भूटान और नेपाल के लिए आवंटित किए गए फंड्स से साफ है कि हम दोनों देशों के साथ साझेदारी को और बढ़ाना चाहते हैं। भारत सरकार के प्रॉजेक्ट्स पारस्परिक लाभ के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं। 

रिपोर्ट में बताया गया, नेपाल और भारत के घनिष्ठ संबंध रहे हैं, विभिन्न क्षेत्रों में हमारे बीच साझेदारी है, हम उस पर कायम हैं। रिपोर्ट में भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा चिंताओं की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। भारत ने भूटान को मदद बढ़ा दी है। वैसे भूटान में अब एक तबका चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने की मांग करने लगा है पर इससे भारत चिंतित नहीं है। भारत और भूटान के बीच मधुर संबंध रहे हैं और नई दिल्ली की ओर से भूटान को सैन्य सहयोग भी दिया जा रहा है। 2017 में डोकलाम विवाद के दौरान भूटान भारत के साथ मजबूती से खड़ा था। उस समय विवादित क्षेत्र में भारतीय सैनिकों ने चीन के जवानों को सड़क बनाने से रोक दिया था। यह गतिरोध 73 दिनों तक चला था। 


 

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