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चारा घोटाला केस में लालू यादव को 7 साल की सजा, 30 लाख जुर्माना 

Publish Date: March 24 2018 11:52:52am

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): जेल में बंद आरजेडी प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें और बढ़ गई है। चारा घोटाला के दुमका ट्रेजरी केस में सीबीआई स्पेशल कोर्ट शनिवार को दोषियों की सजा का एलान कर दिया है। रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने उन्हें आईपीसी 120 और पीसी एक्ट के तहत 7 -7 साल की सजा सुनाई है।  साथ ही उन पर 30-30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। 

हालांकि दोनों मामले साथ-साथ चलेंगे या अलग-अलग इसे अभी कोर्ट ने तय नहीं किया है। अगर सजाएं साथ चलीं तो लालू को 14 साल जेल की सजा भुगतनी पड़ेगी। जज शिवपाल सिंह की कोर्ट ने 19 मार्च को अवैध निकासी के मामले में लालू समेत 19 लोगों को दोषी करार दिया था। बता दें कि लालू पर चारा घोटाले से जुड़े 6 केस दर्ज हैं। इनमें से 4 में वह दोषी ठहराए जा चुके हैं। फिलहाल, लालू झारखंड की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं। न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 तक दुमका कोषागार से फर्जी तरीके से 3.13 करोड़ रुपये निकालने के मामले में यह फैसला सुनाया है। इससे पहले अदालत ने सुनवाई के दौरान लालू यादव को दोषी करार दिया था और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को इस मामले में बरी कर दिया था। तीसरे मामले में भी कोर्ट ने लालू को दोषी करार देते हुए जगन्नाथ मिश्र को बरी कर दिया था। फैसला सुनने के बाद लालू यादव ने जज से पूछा था- 'हुजूर राणाजी छूट गए।' इस पर जज ने कहा- 'उन पर कोई जुर्म साबित नहीं हो पाया।'

बता दें कि दुमका ट्रेजरी से दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच गैर-कानूनी तरीके से 3.76 करोड़ रुपए निकाले गए। इस मामले में सीबीआई ने 11 अप्रैल 1996 को 48 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। 11 मई 2000 को पहली चार्जशीट दायर की गई। जनवरी 1996 में करीब 950 करोड़ रुपए का चारा घोटाला पहली बार सामने आया था। इसके तहत 1990 के दशक में चारा सप्लाई के नाम पर सरकारी ट्रेजरी से ऐसी कंपनियों को फंड जारी हुआ, जो थी ही नहीं। घोटाला हुआ तब लालू बिहार के मुख्यमंत्री थे। उनके पास वित्त मंत्रालय भी था। आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की जांच के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 1996 तक अटकाए रखा। 2 फरवरी 1996 को जांच का आदेश दिया।

इन मामलों पर हुई सजा

पहला मामला- चाईबासा कोषागार से अवैध तरीके से 37.7 करोड़ रुपये निकालने का आरोप। लालू समेत 44 अभियुक्त। 
सजा- मामले में 5 साल की सजा हुई। 

दूसरा मामला- देवघर सरकारी कोषागार से 84.53 लाख रुपये की अवैध निकासी का आरोप। लालू समेत 38 पर केस 
सजा- लालू को साढ़े तीन साल की सजा और 5 लाख का जुर्माना। 

तीसरा मामला- चाईबासा कोषागार से 33.67 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का आरोप। लालू समेत 56 आरोपी।
सजा- लालू दोषी करार, 5 साल की सजा। 

चौथा मामला- दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला। लालू प्रसाद यादव दोषी करार 
सजा- सात साल सजा, 30 लाख जुर्माना।

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