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श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर, नौसेना के हेलीकॉप्टर से संचालित की जाएगी कैलाश यात्रा

Publish Date: March 24 2018 05:47:01pm

नैनीताल (उत्तम हिन्दू न्यूज): उत्तराखंड के रास्ते संचालित होने वाली इस वर्ष की कैलाश मानसरोवर यात्रा पर से कुहासा छटने लगा है। इस वर्ष की यात्रा पर खराब मौसम और बाधित पैदल रास्तों का कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐतिहासिक कैलाश यात्रा इस वर्ष हेलीकॉप्टर से संचालित की जाएगी। वायुसेना के दो एमआई-17 हेलीकाप्टर कैलाश यात्रियों की सेवा में लगाये जायेंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार हेलीकॉप्टर से कैलाश मानसरोवर यात्रा संचालित होने के कारण यात्रा में दो दिनों की कटौती हो जाएगी। इस बार 12 जून के बजाय 14 जून से शुरू होगी। उल्लेखनीय है कि भारत और चीन के बीच हर साल ऐतिहासिक कैलाश मानसरोवर यात्रा संचालित की जाती है। विदेश मंत्रालय की ओर से उत्तराखंड के लिपूलेख दर्रा एवं सिक्किम के नाथूला दर्रे से हिन्दुओं की कैलाश यात्रा संचालित की जाती है। उत्तराखंड के रास्ते हर साल 18 दल कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाते हैं जिनमें हर दल में अधिकतम 60 यात्री शामिल होते हैं। यात्रा हर साल आठ जून से आयोजित की जाती है। पहला जत्था 12 जून को दिल्ली से कैलाश के लिये रवाना होता है। यात्रा 9 सितम्बर तक आयोजित की जाती है। 

पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र लखनपुर से मालपा तक पैदल यात्रा मार्ग अवरूद्ध होने के कारण इस बार विदेश मंत्रालय एवं पिथौरागढ़ जिला प्रशासन यह तय नहीं कर पा रहा था कि यात्रा कैसे और किस रास्ते संचालित की जाये। सीमांत मांगती से नजंग तक सड़क मार्ग निर्माण की संभावनायें भी क्षीण होने के कारण विदेश मंत्रालय और पिथौरागढ़ जिला प्रशासन के माथे पर परेशानी की लकीरें खींचने लगी थीं। विदेश मंत्रालय बताया कि इस बार प्रभावित क्षेत्र में कैलाश यात्रा हेलीकॉप्टर से संचालित की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी वायुसेना को दी है। इस बार कैलाश यात्रा धारचूला के बजाय पिथौरागढ़ के रास्ते संचालित की जाएगी। वायुसेना के दो एमआई-17 हेलीकाप्टर कैलाश यात्रियों के लिये तैनात रहेंगे। यात्रा इस बार परंपरागत धारचूला के बजाय पिथौरागढ़ के रास्ते जाएगी। पिथौरागढ़ से पैदल जाने के बजाय यात्रियों को वायुसेना के हेलीकाप्टर से गुंजी तक ले जाया जायेगा। विदेश मंत्रालय ने पिथौरागढ़ जिला प्रशासन एवं यात्रा संचालित करने वाली एजेंसी कुमाऊं मंडल विकास निगम ने इस प्रस्ताव को स्वीकारते हुए अंतिम मुहर लगा दी है। 

यात्रियों को गुंजी तक हेलीकॉप्टर से ले जाने के बाद वहां दो दिन तक ठहराया जाएगा। इस दौरान उन्हें एक दिन स्थानीय नाबी गांव की सैर करायी जाएगी। इसके बाद तीसरे दिन गुंजी से नाबीढांग के लिये पहले पैदल पड़ाव के लिये यात्री निकलेंगे। मजेदार बात यह है कि इस बार पूरी यात्रा में तीन दिन कम हो जाएंगे। 22 दिन में यात्रा सम्पन्न हो जाएगी। इस दौरान यात्री आठ दिन चीन में विचरण करेंगे। हेलीकॉप्टर यात्रा को लेकर अभी भी रेट तय नहीं हो पाया है। यात्रियों से कितनी धनराशि ली जायेगी, अभी यह तय होना बाकी है। पिछले साल एक यात्री को लगभग 60 हजार रुपये चीन को भुगतान करने पड़ते थे जबकि 35 हजार रुपये कुमाऊं मंडल विकास निगम को। लेकिन इस बार यह राशि तय नहीं हुई है। पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी सी रविशंकरन ने बताया कि यात्रा को लेकर असमंजस खत्म हो गया है। यात्रा इस बार पिथौरागढ़ के रास्ते संचालित की जाएगी और यात्रियों को पिथौरागढ़ से नौसेना के हेलीकॉप्टर से गुंजी तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नौसेना के दो हेलीकाप्टर इस दौरान यात्रा में लगे रहेंगे।
 

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