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एक बार फिर भारतीय सीमा में घुसा चीनी हेलीकाप्टर

Publish Date: March 26 2018 02:08:10pm

चमोली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : उत्तराखंड के चमोली जिले में चीन सीमा पर एक बार फिर से चीन के हेलीकाप्टर देखे जाने की बात बताई जा रही है। हालांकि प्रशासन ऐसी किसी भी घटना से इन्कार कर रहा है। घटना 10 मार्च की बताई जा रही है। इससे पहले भी चमोली बाड़ाहोती क्षेत्र में घुसपैठ की घटनाएं हो चुकी हैं। चमोली में चीन से जुड़ी भारतीय सीमा घुसपैठ की दृष्टि से संवेदनशील मानी जाती है। विशेष का बाड़ाहोती क्षेत्र के बारे में बताया जा रहा है कि यहां चीन समय-समय पर सीमा पर कर जाता है।

बाड़ाहोती 80 वर्ग किलोमीटर में फैला चारागाह है जहां पर स्थानीय लोग अपने जानवरों को लेकर आते हैं। स्थानीय चरवाहे इस क्षेत्र में मवेशियों के साथ डेरा डाले रहते हैं। सूत्रों के अनुसार 10 मार्च को यहां लोगों ने सीमा की ओर से हेलीकॉप्टर आते देखा। जो कुछ देर मंडराने के बाद वापस लौट गया। हालांकि इस संदर्भ में अधिकारी कुछ बोलने से मना कर रहे हैं। इस घटना के बाद  एक बार फिर ये बाड़ाहोती क्षेत्र चर्चा में आ गया है।

इस क्षेत्र में पहले भी चीन की गतिविधि दर्ज की जा चुकी है। चीन इन दिनों लगातार भारतीय सीमा पर अपना दबाव बढ़ाता जा रहा है। इसके कारण भारतीय सेना भी सतर्क है लेकिन इतनी सतर्कता के बाद भी चीनी हेलीकाप्टर भारतीय सीमा में कैसे दाखिल हुआ यह समझ से पड़े है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह हेलीकाप्टर चीन का ही था क्योंकि उसपर चीन के झंडे साफ दिख रहे थे लेकिन स्थानीय अधिकारी इस बात को पुष्ट करने के लिए तैयार नहीं हैं। 

इससे पहले चमोली जिले इसी क्षेत्र में भारतीय सीमा में दो चीनी हेलीकाप्टरों की घुसपैठ का मामला सामने आया था। बताया जा रहा है कि बाड़ाहोती क्षेत्र में ये हेलीकॉप्टर करीब तीन मिनट तक मंडराते रहे। हालांकि उस समय में भी चमोली की पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट ने घुसपैठ से इन्कार करते हुए कहा था कि संभवत: हेलीकॉप्टर रास्ता भटक गए होगा।

भारतीय क्षेत्र में हेलीकॉप्टर घुसने का यह पहला मौका नहीं है। वर्ष 2014 में भी इसी इलाके में चीन का विमान देखा गया था। इसके बाद जुलाई 2016 में चीनी सेना की घुसपैठ को लेकर चमोली सुर्खियों में रहा था। क्षेत्र के निरीक्षण को गई राजस्व टीम से चीनी सेना का सामना हुआ था। सैनिकों ने टीम को लौट जाने का इशारा भी किया। इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भी भेजी गई थी। इसके अलावा वर्ष 2015 में चीनी सैनिकों द्वारा चरवाहों के खाद्यान्न को नष्ट करने की घटना भी सामने आई थी।
 

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