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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी में कांग्रेस, विपक्षियों को बांटा मसौदा 

Publish Date: March 27 2018 07:49:50pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की कार्यशैली के खिलाफ अब राजनीतिक दलों ने भी मोर्चा खोलने का मन बना लिया है। इससे पहले सर्वाच्च न्यायालय के चार वरिष्ट न्यायाधीशों ने चीफ के खिलाफ मोर्चा खोला था। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने चीफ जस्टिस मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का एक मसौदा कई दलों को बांटा है। जनवरी में सीपीएम महासचिव सीतराम येचुरी ने भी कहा था कि वह विपक्षी दलों के साथ मिलकर जस्टिस मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे हैं। 

अभीतक कांग्रेस जस्टिस मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर हिचक रही थी और इसके पीछे इस मामले को लेकर पार्टी के भीतर आम राय का न होना बताया जा रहा था। सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर कानूनी विशेषज्ञ नेताओं सहित तमाम नेताओं की दो राय था। एक धड़ा जहां मिश्रा के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन करने की बात कर रहा था, वहीं दूसरे धड़े की राय थी कि फिलहाल हमें न्यायपालिका में दखल देने की जरूरत नहीं है। इस धड़े की दलील थी कि एक व्यक्ति के बहाने पूरी न्यायपालिका को निशाना नहीं बनाया जा सकता। सूत्रों की मानें तो प्रथम चरण में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस महाभियोग से सहमत नहीं थे लेकिन अब उन्होंने भी इस मामले के लिए अपनी स्वीकृति दे दी है।   

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोटज़् के 4 जजों जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन भीमराव लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चारों जजों ने एक चि_ी जारी की थी, जिसमें गंभीर आरोप लगाए गए थे। जजों के मुताबिक यह चि_ी उन्होंने चीफ जस्टिस को लिखी थी। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित 7 पन्नों के पत्र में जजों ने कुछ मामलों के असाइनमेंट को लेकर नाराजगी जताई थी। जजों का यह भी आरोप थे कि चीफ जस्टिस की ओर से कुछ मामलों को चुनिंदा बेंचों और जजों को ही दिया जा रहा है। 

इस माभियोग के बहाने कांग्रेस दबाव बनाने की राजनीति कर रही है। बताया जा रहा है कि महाभियोग प्रस्ताव के पीछे विपक्ष की रणनीति दबाव बनाने की भी है। दरसअल, विपक्ष की मंशा चीफ जस्टिस पर दबाव की है। विपक्ष मानता है कि आने वाले समय में कई अहम मामले उनके सामने आनेवाले हैं। चीफ जस्टिस का कार्यकाल आगामी 2 अक्टूबर तक है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण मामले उनके समक्ष आ सकते हैं और यही कारण है कि कांग्रेस सहित संपूर्ण विपक्ष न्यायमूर्ति मिश्रा पर दबाव बनाना चाहता है। 
 

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