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भारतीय संचार प्रणाली में जुड़ेगा नया अध्याय, GSAT-6A सैटेलाइट की लॉन्चिग आज

Publish Date: March 29 2018 09:55:34am

चेन्नई (उत्तम हिन्दू न्यूज) : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आज यानी वीरवार को अपना जीसैट-6ए संचार उपग्रह चेन्नई से 110 किमी दूर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च करेगा। इस उपग्रह की खासियत है कि यह मल्टी-बीम कवरेज सुविधा के जरिए भारत को मोबाइल संचार उपलब्ध कराएगा। इसरो के सूत्रों से मिली जानकारी में बताया गया है कि लॉन्च के लिए उल्टी गिनती बुधवार को ही शुरू कर दी गयी थी और आज शाम 4.56 बजे इसे लॉन्च कर दिया जाएगा। 2000 किलोग्राम वजन वाला इस सैटेलाइट को बनाने में करीब 270 करोड़ रुपयों की लागत आई है।

इसरो द्वारा लॉन्च किया जा रहा यह उपग्रह एक हाई पावर एस-बैंड संचार उपग्रह है, जो अपनी कैटेगरी में दूसरा है। भारत इससे पहले जीसैट-6 लॉन्च कर चुका है। आज लॉन्च होने वाला यह नया उपग्रह, अगस्त 2015 से धरती की कक्षा में चक्कर लगा रहे जीसैट-6 को सपोटज़् देने के लिए भेजा जा रहा है। इस नए सैटेलाइट में ज्यादा ताकतवर कम्यूनीकेशन पैनल्स और डिवाससेस लगाई गई हैं।

इस सैटेलाइट में लगा 6 मीटर का कॉम्पैक्ट एंटीना धरती पर कहीं से भी सैटेलाइट कॉलिंग को और आसान बना देगा। इस सैटेलाइट के लॉन्च कर सरकार चाहती है कि देश में छोटे ग्राउंड स्टेशन और हाथ में पकड़े जाने वाले उपकरणों से कॉलिंग करने की सुविधा का विकास किया जा सके। जीसैट-6ए सैटेलाइट किसी सामान्य संचार उपग्रह से बहुत खास है। आसान शब्दों में कहें तो जीसैट-6ए भारत में सैटेलाइट आधारित मोबाइल कॉलिंग और कम्यूनीकेशन को बहुत आसान बनाने में मददगार साबित होगा। 

बता दें कि जीसैट-6ए खासतौर पर सेनाओं के बीच दूरस्थ स्थानों से होने वाली कॉलिंग को आसान बनाएगा। इसरो के मुताबिक यह सैटेलाइट जनरल संचार सेवाओं के लिए किसी ट्रांसपॉन्डर क्षमता को नहीं बढ़ाएगा, बल्कि यह उपग्रह खास तौर पर रिमोट एरिया में मौजूद सेनाओं की टुकडय़िों के बीच बेहतर संचार प्रणाली विकसित करने में मददगार होगा। इस काम के लिए जीसैट-6ए में लगा 6 मीटर चौड़ा छाते जैसा एंटीना ही रामबाण साबित होगा।

इसरो द्वारा आमतौर पर भेजे जाने वाले सैटेलाइट्स में लगे किसी भी एंटीने की तुलना में 6 का एंटीना करीब 3 गुना ज्यादा बड़ा और पावरफुल है। इसकी यही क्षमता भारतीय सेनाओं और उनकी टुकडय़िों के बीच हैंडहेल्ड डिवायसेस के इस्तेमाल से सीधी कॉलिंग को संभव बनाएगी। छोटे ऐंटीने वाले बाकी किसी भी संचार उपग्रह के द्वारा धरती पर रहते हुए सैटेलाइट कम्यूनीकेशन करने के लिए बड़े ग्राउंड स्टेशन की जरूरत होती है, लेकिन यह जीसैट-6 इसी समस्या को हल करके सेनाओं के बीच के संचार को आसान और तेज बना देगा। इसका फायदा सेनाओं के ऑपरेशन के दौरान ज्यादा कारगर साबित होगा।

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