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जजों की नियुक्ति पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, जस्टिस जोसेफ के नाम पर होगा पुन: विचार 

Publish Date: April 26 2018 03:13:39pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति पर एक बार फिर से कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच सियासी संग्राम छिड़ गया है। फिलहाल इस मामले में केन्द्र सरकार ने साफ कह दिया है कि कॉलेजियम जस्टिस जोसेफ के नाम पर फिर से विचार करें। जस्टिस केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट का जज नहीं बनाने को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा को जज बनने पर बधाई दी जबकि उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट नहीं भेजने पर केंद्र को आड़े हाथ लिया। 

इस मामले में केंद्र सरकार ने भी कांग्रेस पर पलटवार करते हुए उसके आरोपों को खारिज किया है। उधर, सूत्रों के अनुसार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलिजियम से जस्टिस जोसेफ के नाम पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। यानी अपने ओर से केन्द्र सरकार ने जोसेफ के नाम को ना बोल दिया है। बता दें कि कॉलिजियम ने वरीयता क्रम में जस्टिस जोसेफ को पहले और मल्होत्रा को दूसरे नंबर पर रखा था।

सिब्बल ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश में न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में है। उन्होंने कहा, सरकार हाई कोर्ट में अपने लोगों को बैठाना चाहती है। जस्टिस केएम जोसेफ पर कॉलिजियम की अनुशंसा को सरकार पास नहीं कर रही है। सिब्बल ने प्रमाण-पत्र देते हुए जोसेफ  को काबिल जज बताया और कहा कि जोसेफ सबसे काबिल जजों में शुमार होते हैं लेकिन केंद्र सरकार उनकी नियुक्ति में अड़ंगा लगा दिया है। साथ ही सिब्बल ने कहा कि जस्टिस जोसेफ ने ही उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के एनडीए सरकार के फैसले को पलट दिया था। उन्होंने कहा कि संभवत: सरकार उसका बदला भी उनसे ले रही हो। 

सिब्बल ने कहा, हम वकीलों से पूछना चाहते हैं कि आज न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए कौन खड़ा होगा। सिब्बल ने देश के कई हाई कोर्ट में जजों के खाली पदों का ब्योरा देते हुए कहा, इलाहाबाद हाई कोर्ट में 60, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में 31, बॉम्बे हाई कोर्ट में 24, कलकत्ता हाई कोर्ट में 39, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में 23, गुजरात हाई कोर्ट में 22, कर्नाटक हाई कोर्ट में 32, एमपी और ओडिशा हाई कोर्ट में 21-21, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में 35 और राजस्थान हाई कोर्ट में 17 सीटें खाली हैं। केंद्र सरकार यहां अपने लोगों को भरना चाहती है। 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने इस मामले में केन्द्र सरकार के खिलाफ टिप्पणी की है। चिदंबरम ने कहा कि कानून के तहत जजों की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट के कॉलिजियम की सिफारिश ही फाइनल और बाध्यकारी होती है। उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि क्या मोदी सरकार कानून से भी ऊपर है? चिदंबरम में एक अन्य ट्वीट में कहा, जस्टिस केएम जोसेफ की नियुक्ति में कौन सी चीज बाधा है। उनका स्टेट या उनका धमज़् या उत्तराखंड केस में उनका फैसला।

इधर केन्द्र सरकार ने भी मोर्चा खोल दिया है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए उल्टे कांग्रेस पर ही आरोप लगा दिया है। कानून मंत्री ने कहा कि देश के कई जज जस्टिस जोसेफ से सीनियर हैं। कांग्रेस का रेकॉर्ड सबको पता है। जस्टिस जोसेफ से 41 जज सीनियर हैं। खबरों के मुताबिक सरकार ने कॉलिजियम से जस्टिस जोसेफ के नाम की अनुशंसा पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है। 

कॉलिजियम ने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ की नियुक्ति की भी सिफारिश की थी। जस्टिस जोसेफ और मल्होत्रा के प्रमोशन की सिफारिशें लगभग तीन महीने पहले की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट कॉलिजियम की सिफारिश करने की फाइल 22 जनवरी को कानून मंत्रालय पहुंची। फरवरी के प्रथम सप्ताह में शुरू हुई स्वीकृति की प्रक्रिया में केवल इंदु मल्होत्रा का नाम आगे बढ़ सका है। 

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