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हॉटलाइन से जुड़ेंगे भारत-चीन, स्वदेश लौटे पीएम मोदी

Publish Date: April 28 2018 07:49:46pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : चीन की यात्रा करके भारत के प्रधानमंत्री स्वदेश लौट आए हैं। इस यात्रा के दौरान क्या-क्या हुआ इसकी खबर लगातार मीडिया के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती रही है लेकिन इस यात्रा के दूरगामी प्रभाव क्या होंगे इस पर अब देश में चर्चा होने लगी है। फिलहाल दुनिया के दो बड़े जनसंख्या वाले देश के बीच दोस्ती की इस नई शुरुआत को कई बिन्दुओं पर मूल्यांकित किया जा रहा है। यात्रा के बाद विदेश सचिव विजय गोखले ने मीडिया को बताया कि भारत और चीन के बीच दस बिन्दुओं पर सहमति बनी है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण सीमा पर स्थाई शांति को लेकर दोनों देशों के हॉटलाइन से जुडऩे की योजना है।  

दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले दो देश, भारत और चीन के बीच नए युग की शुरुआत हो रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जल्द ही दोनों देश सीमा पर स्थाई शांति के लिए ठोस कदम उठा सकते हैं। लिहाजा जल्द ही दोनों देशों को हॉटलाइन से जोड़ दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के बीच भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और संयम बनाए रखने को लेकर सहमति बनी है। दोनों नेता अपनी-अपनी सेनाओं को स्ट्रैटेजिक गाइडेंस जारी करने और शांति बनाए रखने के लिए जरूरी स्ट्रैटेजिक मेकेर्निम मजबूत करने पर राजी हुए हैं। भारत और चीन के बीच 3,488 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) है।  

चीन के इस हालिया यात्रा से दोनों देशों के नेता बेहद उत्साहित हैं। दोनों देशों के नेताओं ने इस यात्रा को दुनिया की शांति के लिए महत्वपूर्ण बताया है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों से जारी खबर में बताया गया है कि इस यात्रा के दौरान मोदी और जिगपिंग के बीच 10 बिन्दुओं पर चर्चा हुई और सहमति बनी है। लिहाजा डोकलाम को लेकर सीधे तौर पर कोई बात नहीं हुई लेकिन दोनों देश आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए तैयार है।

दोनों नेताओं ने भारत-चीन सीमा पर शांति बहाली पर जोर दिया और फैसला किया कि दोनों देश में भरोसा और परस्पर संवाद कायम हो इसके लिए वे अपने-अपने देशों की मिलिटरी को रणनीतिक निर्देश जारी करेंगे। दोनों देश अफगानिस्तान में एक संयुक्त आर्थिक परियोजना पर सहमति जताई है। भारत और चीन एक संयुक्त उद्यम के तहत अफगानिस्तान में आर्थिक परियोजना शुरू कर सकते है। विदेश सचिव के मुताबिक दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने पर जोर देने की बात स्वीकार कर ली है। आतंकवाद के खिलाफ  लडऩे में एक दूसरे की मदद करने का आश्वासन दिया।

प्रेस ब्रीफिंग में विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि भारत-चीन सीमा मामलों में दोनों नेता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इसके लिए विशेष दूत नियुक्त किए जाएं जो परस्पर और पारदर्शी तरीके से ये मुद्दा सुलझाने के तरकीब सुझाएं। दोनों नेताओं ने माना कि भारत और चीन में दुनिया की कुल 40 फीसदी आबादी रहती है। ऐसे में दोनों देशों का साथ चलना जरूरी है। जिनपिंग और मोदी ने सेनाओं के बीच बेहतर संवाद की भी जरूरत बताई। 
 

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