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नया विवाद, अगले सप्ताह फिर से केन्द्र को जस्टिस जोफेस का नाम भेज सकता है कलीजियम 

Publish Date: April 29 2018 12:43:05pm

त्रिशूर (उत्तम हिन्दू न्यूज) : न्याय पालिका केन्द्र सरकार से नया पंगा लेने जा रहा है। कलीजियम जस्टिस कुरियन जोसेफ का नाम फिर से केन्द्र सरकार को भेजेगा। दरअसल, हाल ही में जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट पदोन्नत करने के मामले में केन्द्र सरकार ने उनके नाम को वापस कर दिया था और कलीजियम से उनके नाम पर विचार करने को कहा था लेकिन कलीजियम ने न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ का नाम फिर से केन्द्र सरकार को भेजा जा रहा है। स्वाभाविक तौर पर इसके बाद न्यायपालिका और केन्द्र सरकार के बीच विवाद बढ़ेगा। 

आपको बता दें कि उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ को पदोन्नति देकर सुप्रीम कोर्ट भेजने की सिफारिश को लौटाने के केंद्र सरकार के फैसले पर कलीजियम ने साफ कर दिया है कि उनका फैसला जायज है और वे फिर से जस्टिस कुरियन के नाम की सिफारिश करेंगे। हालांकि कलीजियम ने इस संदर्भ में कोई आधिकारिक बयान तो जारी नहीं किया है लेकिन जस्टिस कुरियन जोसेफ के बयान से यह अनुमान लगाया जाने लगा है कि उनके नाम को एक बारि फर कलीजियम की सहमति के आधार पर केन्द्र सरकार को भेजा जा सकता है। 

जस्टिस कुरियन जोसेफ ने एक मीडिया समूह को बताया कि यह कोई क्षेत्रीय मसला नहीं है, कई मसले हैं जिस पर बात की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सिफारिश को खारिज करनेवाले सरकार के पत्र का कलीजियम जवाब देगा। इससे ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि कलीजियम जस्टिस जोसेफ के नाम को फिर से भेज सकता है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने कुछ दिनों पहले ही जस्टिस केएम जोसेफ की पदोन्नति की सिफारिश को सुप्रीम कोटज़् को लौटा दिया था। केंद्र ने वरिष्ठता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के संतुलन के साथ ही सुप्रीम कोर्ट की बेचों में एससी और एसटी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया था। 

जस्टिस जोसेफ ने कहा कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट कलीजियम की बैठक होने वाली है, जिसमें जस्टिस केएम जोसेफ के मुद्दे पर तथ्य सामने रखे जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने जिसे तथ्य माना है, वह तथ्य नहीं हैं और वास्तविक तथ्य उनके सामने रखे जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि वह कलीजियम की बैठक के नतीजे को लेकर काफी सकारात्मक हैं। उन्होंने कहा, पहले की सिफारिश के पीछे के तथ्य और आंकड़े सरकार को समझाए जाएंगे। जब फैक्ट्स और फिगर्स सामने रखे जाएंगे, सरकार को अहसास होगा कि वास्तविक फैक्ट्स क्या हैं और इससे उनका नजरिया बदल सकता है। 
 

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