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आक्रामक कश्मीर नीति पर मंथन, आतंकवाद पर अंतिम चोट की योजना में मोदी सरकार  

Publish Date: May 09 2018 01:41:11pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : कश्मीर घाटी में दिनों दिन बिगड़ते हालात के मद्देनजर सरकार और सुरक्षा तंत्र का शीर्ष नेतृत्व कश्मीर की मौजूदा नीति पर पुनर्विचार पर गहन मंथन कर रहा है। प्रेक्षकों का मामना है कि घाटी में समाज शास्त्र के प्रोफेसर मोहम्मद रफी भट का आतंकवाद से हाथ मिलाना और सैन्य कार्रवाई में खूंखार आतंकवादियों के साथ उसका मारे जाने के बाद केन्द्र अपनी नीति पर मंथन कर सकता है। अब केन्द्र सरकार को लगने लगा है कि कश्मीर में जो नीति उन्होंने अपनाई है वह सही दिशा में नहीं जा रही है। हालांकि पूर्व खुफिया प्रमुख दिनेश शर्मा के रिपोर्ट पर अभी कुछ भी कहने से हर एजेंसयां कतरा रही है लेकिन जानकारों का मानना है कि केन्द्र को कुछ महत्वपूर्ण तथ्य हाथ लग गया है जिसको आधार बनाकर वह अपनी आक्रामक नीति में परिवर्तन के लिए बाध्य हो रही है। 
 
शीर्ष सरकारी सूत्रों के मुताबिक अगर सैन्य कार्रवाई में कुछ दिनों की ढील देने के विकल्प पर अमल किया जाए तो नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार इंतजार में बैठे सैकड़ो पाक प्रशीक्षित आतंकवादी घाटी में अपनी पैठ मजबूत कर लेंगे। यह स्थिति स्थानीय आतंकवादियों के मुकाबले कई गुणा ज्यादा खतरनाक होगी। सेना के उत्तरी कमान के पूर्व प्रमुख और कश्मीर में लंबी कार्रवाई कर चुके लेफ्टिनेंट जनरल दीपेन्द्र हुडा ने माना कि कश्मीर में सिर्फ सैन्य कार्रवाई से हालात नहीं सुधरेंगे। 

हुडा के मुताबिक सघन कारज़्वाई के साथ युवाओं को मुख्यधारा में जोडऩे में सरकार कमजोर पड़ गई है। यही वजह है कि सिफज़् युवक ही नहीं कॉलेज के छात्र- छात्राएं और महिलाएं भी सड़क पर उतरने लगे हैं। विश्वविद्याल के प्रोफेसर का आतंकवाद की तरफ मुडऩा वाकई एक खतरनाक संकेत है। लेफ्टिनेंट जनरल हुडा ने बताया कि कश्मीर की आवाम को सरकार की तरफ से सिर्फ बंदूक की कार्रवाई का संदेश मिल रहा है। ऐसा नहीं कि सेना और सुरक्षा बल की चलने वाले सदभावना कार्यक्रम, कश्मीरी युवाओं का देश भ्रमण और व्यवसायिक प्रशिक्षण जैसी योजनाएं खत्म कर दी गई हैं। 

लेकिन केंद्र और राज्य सरकार अपने सकारात्मक संदेशों में कमजोर दिख रही है। इस सूरत में वहां के युवक अलगाववादियों और आतंकवादियों की तरफ देख रहे हैं। हुडा के मुताबिक कश्मीर पॉलिसी पर पुनविज़्चार की जरुरत है। सुरक्षा तंत्र के कश्मीर से जुड़े अधिकारी ने बताया कि फिलहाल दो कदम आगे-एक कदम पीछे की नीति के तहत कुछ ठोस फैसले लिए जा सकते हैं। अधिकारी के मुताबिक कश्मीर में सरकार दो तरफा घिर गई है। अगर वह स्थानीय आतंकियों पर दबिश जारी रखती है तो आम लोग सड़क पर उतरते हैं और नए आतंकी पैदा होते हैं। अगर ढील देती है तो पाकिस्तानी आतंकियों की पैठ बढ़ती है। इसलिए कश्मीर नीति पर सरकार कुछ अलग करने की योजना बना रही है। 
 

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