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अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करेगी भारतीय सेना, मोदी सरकार ने दी मंजूरी

Publish Date: May 20 2018 03:53:28pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : अपने दुश्मनों को मात देने और क्षेत्रीय सीमा को सभी दृष्टि से सुरक्षित रखने के लिए भारत अपने रक्षा रणनीति में भारी परिवर्तन की योजना पर काम करना प्रारंभ कर दिया है। 

आपको बता दें कि अब दुनिया में जो लड़ाई लड़ी जाएगी उसका स्वरूप एकदम अलग होगा। वहां पारंपरिक हथियार का कोई स्थान नहीं होगा। ऐसे में भारत को भी अपनी रक्षा पंक्ति को सुदृढ करना होगा। 

मसलन भारत ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिया है। इस प्रकार की महत्वाकांक्षी योजना की मंजूरी नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने दे दी है। हाजा एक महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना के तहत सरकार ने रक्षा बलों के लिए आर्टिफिशल इंटेलीजेंस (एआई) के इस्तेमाल पर काम करना शुरू कर दिया है। परियोजना का मकसद सुरक्षा बलों को मानव 

रहित टैंक, पोत, हवाई यानों और रोबॉटिक हथियारों से लैस करते हुए उनकी अभियान संबंधी तैयारी को महत्वपूर्ण तरीके से बढ़ाना है। परियोजना अपनी सेना के लिए आर्टिफिशल इंटेलीजेंस के व्यापक 

इस्तेमाल की खातिर चीन के बढ़ते निवेश के बीच देश की थल सेना, वायु सेना और नौसेना को भविष्य के युद्धों के लिहाज से तैयार करने की एक व्यापक नीतिगत पहल का हिस्सा है। 

संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन इस दिशा में पहले से कदम बढ़ा चुका है और भारत का परोसी देश चीन अब अपने सेना को इस तकनीक से सज्ज कर रहा है। चीन की बड़ी योजना है। 

इसलिए भारत को आने वाले समय में नई-नई चुनौतियों का सामना करना होगा। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत अभी से अपनी रणनीति पर काम करना प्रारंभ कर दिया है। 

रक्षा सचिव (उत्पादन) अजय कुमार ने कहा कि सरकार ने रक्षा बलों के तीनों अंगों में आर्टिफिशल इंटेलीजेंस की शुरूआत करने का फैसला किया है क्योंकि यह भविष्य के युद्धों की जरूरत को देखते हुए एक अहम क्षेत्र होगा। उन्होंने कहा कि टाटा सन्स के प्रमुख एन चंद्रशेखरन की अध्यक्षता वाला एक उच्च स्तरीय कायज़्बल परियोजना की बारीकियों एवं संरचना को अंतिम रूप दे रहा है। सशस्त्र बल और निजी क्षेत्र भागीदारी के मॉडल के तहत परियोजना को कार्यान्वित करेंगे। 

उन्होंने बताया कि दूसरी विश्व शक्तियों की ही तरह भारत ने भी अपने सशस्त्रों बलों की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशिल इंटेलीजेंस के इस्तेमाल को लेकर काम करना शुरू कर दिया है। कुमार ने कहा कि मानव रहित हवाई यान, मानव रहित पोत एवं मानव रहित टैंक और हथियार प्रणाली के रूप में स्वचालित रोबॉटिक रायफल का भविष्य के युद्धों में व्यापक इस्तेमाल होगा। उन्होंने कहा, हमें इनके लिए क्षमताओं का निर्माण करने की जरूरत है। सैन्य सूत्रों ने कहा कि परियोजना में रक्षा बलों के तीनों अंगों के लिए मानवरहित प्रणालियों की व्यापक श्रृंखला का उत्पादन भी शामिल होगा। 

उन्होंने बताया कि रक्षा बल दूसरी शीर्ष विश्व सैन्य शक्तियों की तरह ही अपनी अभियान संबंधी तैयारी में आर्टिफिशल इंटेलीजेंस के व्यापक इस्तेमाल पर मजबूती से जोर दे रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि चीन एवं पाकिस्तान से लगी देश की सीमाओं की निगरानी में आर्टिफिशल इंटेलीजेंस के इस्तेमाल से संवेदनशील सीमाओं की सुरक्षा में लगे सशस्त्र बलों पर दबाव महत्वपूर्ण रूप से कम हो सकता है। चीन आर्टिफिशल इंटेलीजेंस अनुसंधान एवं मशीनों से जुड़े अध्ययन में अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है। 
 

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