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चमगादड़ से फैलने वाले वायरस से केरल में 16 लोगों की मौत, हाई अलर्ट पर राज्य 

Publish Date: May 22 2018 10:37:23am

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): दक्षिण भारत के केरल में कोझीकोड में एक ऐसा वायरस सामने आया हो जिससे दो लोगों की मौत हो गई है। केरल में 25 लोगों ने निपाह नामक एक वायरस के सैंपल खून में मिले हैं, जिससे उनकी जान को भी खतरा है। इसके लिए सभी लोगों को निगरानी में रखा गया है। सूत्रों के अनुसार इस वायरस के फैलने से 16 लोगों की मौत हो चुकी है। 

इस बाबत केंद्र सरकार को भी सूचित किया गया है और मदद मंगी गई है। इसी बात पर संज्ञान लेते हुए स्वास्थय मंत्री जेपी नड्डा ने एनसीडीसी की टीम को केरल के दौरे पर भेजा है। बताया जा रहा है कि नेशनल सेंटर फॉर डीसीज कंट्रोल (एनसीडीसी) की टीम केरल में निपाह वायरस प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की कमेटी वायरस की जानकारी जुटा रही है। उधर, पुणे वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट ने खून के तीन नमूने लिए, जिसमें निपाह वायरस होने की भी पुष्टि हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों और जानवरों में फैलता है।  

इस जगह के कारण ही इसे निपाह वायरस नाम दिया गया। पहले इसका असर सुअरों में देखा गया था। फिर 2004 में यह वायरस बांग्लादेश में फैला। भारत में यह केरल में पहली बार सामने आया है। इस वायरस से प्रभावित लोगों को सांस लेने की दिक्कत होती है फिर दिमाग में जलन महसूस होती है। वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत हो जाती है। बताया जा रहा है कि  अब तक इस वायरस से जुड़ी कोई वैक्सीन नहीं आई है। इस वायरस से बचने के लिए फलों, खासकर खजूर खाने से बचना चाहिए। पेड़ से गिरे फलों को नहीं खाना चाहिए। बीमार सुअर और दूसरे जानवरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि ये मौतें निपाह (एनआईवी) वायरस से ही हुई है। 

पहली बार इस वायरस की चपेट में आए केरल को हाई अलर्ट पर रखा गया है और दो कंट्रोल रूम भी खोले गए हैं। हालात पर निगरानी रखने के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की उच्च स्तरीय टीम भी पहुंच गई है। 

बता दें कि ये वायरल इंसान तथा जानवरों में फैलने वाला नया संक्रमण है। 1998 के दौरान मलेशिया के कामपुंग सुनगेई निपाह में सबसे पहले इस वायरस की पहचान हुई। उस समय सुअरों को इसका वाहक बताया गया था। हालांकि बाद में फैले इस वायरस का कोई वाहक नहीं पाया गया। बांग्लादेश में 2004 में यह वायरस फैला। इस बार इसका कारण संक्रमित चमगादड़ के खाए फलों का सेवन करना पाया गया। भारत में सबसे पहले यह वायरस जनवरी 2001 में सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) में फैला था जबकि अप्रैल 2007 में पश्चिम बंगाल के नादिया तक पहुंच गया था। 

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