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आतंकवादी जैबुल्लाह का खुलासा, हाफिज और लखवी पाकिस्तान में चलाते हैं 7 आतंकी सेंटर 

Publish Date: May 28 2018 11:06:50am

श्रीनगर (उत्तम हिन्द न्यूज) : जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में 20 मार्च को सेना के एक ऑपरेशन के दौरान पकड़ा गया आतंकवादी जैबुल्लाह कई चौकाने वाले खुलासे किए हैं। पूछताछ के दौरान उन्होंने बताया कि जमात-उद-दावा निहायत खतरनाक आतंकवादी संगठन है। जैबुल्लाह ने बताया कि हाफिज सईद और जकीउर रहमान लखवी जैसे आतंकियों के सरगना युवाओं की भर्ती करते हैं और कई चरणों में उन्हें भारत के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार करते हैं। 

जैबुल्लाह ने बताया कि नए लड़ाकों को लगभग दो साल तक ट्रेनिंग दी जाती है। जमात में वरिष्ठता के सात चक्र हैं, जो ट्रेनिंग पर नजर रखते हैं। इन लोगों को खैबर पखतुनखवा के जंगलों, मुजफ्फराबाद और मुदरिके के रीजनल सेंटर समेत सात जगहों पर ट्रेनिंग मिलती है। आपको बता दें कि इसी साल मार्च के महीने में जैबुल्लाह अपने पांच अन्य साथियों के साथ भारतीय सीमा में हमले की प्लानिंग के तहत आया था, उसके बाकी साथियों को एनकाउंटर में मार गिराया गया और उसे जिंदा पकड़ लिया गया। इस दौरान दो पुलिस वाले भी शहीद हो गए थे। 

नैशनल इनभिस्टिगेटिव एजेंसी (एनआईए) द्वारा की जा रही पूछताछ में जैबुल्लाह ने बताया, यह एक खुला निमंत्रण होता है। जमात के नेता 15-20 साल के पाकिस्तानी युवाओं को जिहाद का हिस्सा बनने और खुद का बलिदान देने के लिए बुलाते हैं। उनका नाम, पता और फोन नंबर ले लिया जाता है। सात स्तर के वरिष्ठता क्रम में सबसे ऊपर हाफिज सईद खुद है लेकिन वहां उसका नाम आमिर साहब या आमिरे-मसगर है। हाफिज के नीचे जोनल, डिस्ट्रिक्ट, तहसील, टाउन और सेक्टर लेवल पर भर्ती करने वाले मौजूद हैं। इसमें ट्रेनिंग देने वालो को मसूल और सबसे निचले लेवल वालों को काकरून कहा जाता है।

जैबुल्लाह के मुताबिक, नए लड़ाकों के लिए मसूल मदरसों के बच्चों को चुनते हैं और उन्हें लाहौर के मुरिदके में स्थित सेंटर पर लाते हैं। जैबुल्लाह को उसके पिता ही ले गए थे, जोकि मुल्तान में एक मसूल के रूप में काम कर रहे थे। उसने छह ट्रेनिंग लोकेशंस के बारे में जानकारी शेयर की और बताया कि इन सेंटर्स को मसकर कहा जाता है। जैबुल्लाह ने यह भी बताया कि हर सेंटर पर पाकिस्तानी आर्मी और आईएसआई के लोग मदद के लिए मौजूद रहते हैं। 

इन मॉड्यूल्स के पूरा हो जाने के बाद हाफिज सईद और लखवी सामने आते हैं। जैबुल्लाह की ट्रेनिग के दौरान, जनवरी में हो रही दूसरे चरण की ट्रेनिंग के कैंप डैकेन में लखवी आया था। अंबोरे ट्रेनिंग कैंप में हाफिज सईद भी आया और लड़ाकों को गले लगाकर भारत के खिलाफ लडऩे के लिए प्रेरित किया। जैबुल्लाह ने बताया कि इन लोगों को मुजफ्फराबाद के कराची फूड सेंटर भेजा गया और वहां से राशन लाने को कहा गया। यहीं पर इन लोगों को यह भी सिखाया गया कि बफीर्ले इलाकों में कैसे रहना है। उसने यह भी बताया कि लश्कर के स्टूडेंट विंग अल मोहम्मदिया के स्टूडेंट्स ने एक ऐसा मोबाइल बनाया है, जिसमें एक चिप डालकर वे आपस मे बातचीत करते हैं। अगर सुरक्षाबल इस फोन को इंटसेप्ट करते हैं तो कनेक्शन अपने आप कट जाता है। 

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