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हड़ताल पर किसान, कल से 10 दिनों के लिए सब्जी मंडी बंद  

Publish Date: June 01 2018 08:32:58pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : आठ राज्यों के किसान शुक्रवार से हड़ताल पर चले गए हैं। किसान संगठनों का दावा है कि इन दस दिनों में वे दूध व सब्जी सहित रोज-मर्रे के कृर्षि उत्पाद शहरों में नहीं जाने देंगे। इस हड़ताल के कारण शहरी क्षेत्रों में दूध और सब्जी की कीमत के संकेत मिलने लगे हैं। इस बीच पंजाब-हरियाणा के शहरी मंडियों में आज तो थोड़ी बहुत सब्जियां आ गयी लेकिन मंडी में सब्जी बेचने वालों ने ग्राहकों से साफ तौर पर कह दिया कि कल से 10 दिनों के लिए सब्जी मंडी बंद रहेगी। 

इधरा किसान आन्दोलन पर राजनीति भी प्रारंभ हो गयी है। जहां एक ओर भारतीय किसान संघ ने इस इस हड़ताल को साजिश करार दिया है वहीं कांग्रेस के नेता एवं पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने किसान हड़ताल का समर्थन किया है। किसान आन्दोलन के कारण बाजार में सब्जी की किल्लत के मद्देनजर बड़ी संख्या में लोग सब्जी खरीदे दिखे। लिहाजा सब्जी मंडी में आज जबरदस्त भीड़ दिखी।  

किसान यूनियन ने ये हड़ताल मध्य प्रदेश के मंदसौर किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर बुलाया है। आपको बता दें पिछले साल मंदसौर में पुलिस की गोलीबारी में 6 किसानों की मौत हो गई थी। हड़ताल का असर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में देखने को मिल रहा है। किसान संगठनों की ओर से जारी सूचना में बताया गया है कि इस बार किसान हड़ताल के नाम पर सड़कों पर नहीं उतरेंगे बल्कि वो बाज़ारों में दूध और सब्जियों की सप्लाई को रोक देंगे। किसानों के मुताबिक शहर के लोग चाहें तो सीधे गांवों से अपनी जरूरत का सामान खरीद सकते हैं।

किसानों की मुख्य मांगों में कर्जमाफी, न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाना और अपनी फसलों का अधिकतम दाम शामिल हैं। 11 मई को भोपाल के गांधी आश्रम वर्धा में किसानों के करीब सौ संगठनों की एक बैठक हुई थी। ये बैठक राष्ट्रीय किसान महासंघ ने आयोजित की थी। इसी बैठक के दौरान 10 दिनों के आंदोलन को लेकर चर्चा की गई थी। 

महाराष्ट्र के किसान आंदोलन में भाग लेने वाले स्वाभिमान संगठन और आरएसएस की भारतीय किसान संघ ने इस 10 दिन के आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया है और इस आन्दोलन को एक साजिश बताया है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने इस हफ्ते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की थी। मुलाकात में पार्लियामेंट के मॉनसून सेशन में किसानों के मुद्दों को उठाने की अपील की गई थी।

प्रदर्शनकारी कियानों के मुताबिक  पिछले साल किसान आंदोलन में हिंसा भड़कने का मुख्य कारण व्यवस्था में लापरवाही और बातचीत की कमी थी। इस साल प्रदर्शनकारियों को सोशल मीडिया के जरिए शांतिपूर्ण आंदोलन का संदेश पहुंचाया जा रहा है। 


 

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