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RSS के मंच से बोले प्रणब मुखर्जी, हमारी राष्ट्रीयता किसी धर्म या जाति से बंधी नहीं

Publish Date: June 07 2018 09:13:29pm

नागपुर (उत्तम हिन्दू न्यूज): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सबने इस बात को माना है कि हिंदू एक उदार धर्म है। ह्वेनसांग और फाह्यान ने भी हिंदू धर्म की बात की है। राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचना है। देशभक्ति का मतलब देश की प्रगति में आस्था है। भारत के दरवाजे सबके लिए खुले हैं। मैं यहां देश और देशभक्ति समझाने आया हूं, मैं यहां देश की बात करने आया हूं। प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भेदभाव और नफरत से भारत की पहचान को खतरा है। नेहरू ने कहा था कि सबका साथ जरूरी है।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत दुनिया का पहला राज्य है और विविधतता हमारी सबसे बड़ी ताकत है। प्रणब मुखर्जी ने कहा कि विचारों में समानता के लिए संवाद जरूरी है, संवाद के जरिए हर समस्या का समाधान हो सकता है। 5000 पुरानी हमारी सभ्यता को कोई भी विदेशी आक्रमणकारी और शासक खत्म नहीं कर पाया। राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचान है। हिंदू एक उदार धर्म है। भारतीय राष्ट्रवाद में एक राष्ट्रीय भावना रही है। देशभक्ति का मतलब देश के प्रति आस्था है। इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत  सहित करीब 707 स्वयंसेवक वहां पर मौजूद हैं। 

RSS प्रमुख मोहन भागवत कहा कि यहां पर किसी के आने पर रोक नहीं है। यहां आइए और संघ को परखिए। वैसे हम तो संघ को जानते हैं और आप भी जानिए और अपना विचार बनाइए। संघ सिर्फ हिंदुओं का संगठन नहीं है। हम सभी विचारों के लोगों को साथ लेकर चलना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सभी लक्ष्य एक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शक्ति के साथ शील होना बेहद जरूरी है और संघ यही काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रहारों के बावजूद संघ तरक्की करता रहा। भागवत ने कहा कि हिंदुस्तान में कोई दुश्मन नहीं है। सबकी माता भारत माता ही है।
 
इससे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) संस्थापक डा . केशव बलिराम हेडगेवार को भारत मां का सच्चा सपूत बताया। आरएसएस के संघ शिक्षा वर्ग (तृतीय वर्ष ) के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में हिस्सा लेने से पहले मुखर्जी ने गुरुवार को आरएसएस मुख्यालय पर रखी आगन्तुक पुस्तिका में लिखा" आज मैं यहां भारत माता के एक महान सपूत के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करने और श्रद्धांजलि देने आया हूं। मुखर्जी के आरएसएस मुख्यालय के दौरे को लेकर घमासन मचा हुआ है। पूर्व राष्ट्रपति ने कई मौकों पर आएसएस की आलोचना भी की है । उनके आरएसएस के कार्यक्रम में शिरकत करने को बहुत अप्रत्याशित माना जा रहा है। कांग्रेस के कई नेताओं ने श्री मुखर्जी के आरएसएस के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने पर नाराजगी जतायी है।

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