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आज से कैलाश-मानसरोवर की यात्रा शुरू, जानिए यहां का रहस्य 

Publish Date: June 08 2018 01:26:47pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यृूज) : दुनिया के सबसे ऊंचे शिवधाम कैलास मानसरोवर की यात्रा आज से शुरू हो रही है। पुराणों के अनुसार, यहां शिवजी का स्थायी निवास है। इस स्थान को 12 ज्येतिर्लिंगो में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। हर साल कैलास मानसरोवर की यात्रा करने हजारों साधु-संत, श्रद्धालु, दार्शनिक आते हैं। कहा जाता है कि गर्मी के दिनों में जब मानसरोवर की बर्फ पिघलती है तो एक प्रकार की आवाज लगातार सुनाई देती है। यह स्थान बड़ा ही चमत्कारी है। कई भूवैज्ञानिक कैलाश पर्वत को मानव निर्मित मानते हैं लेकिन आस्था के कारण इसे दैव निर्मित बताया जाता है। 

श्रद्धालुओं का मानना है कि जो आवाज यहां सुनाई देती है वह मृदंग की आवाज है। इस स्थान भागवान शिव की क्रिड़ा स्थल के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। मान्यता यह भी है कि कोई व्यक्ति मानसरोवर में एक बार डुबकी लगा ले तो वह रुद्रलोक को प्राप्त करता है। इस स्थान की गिनती देवी के 51 शक्ति पीठों में भी होती है। माना जाता है कि देवी सती का दांया हाथ इसी स्थान पर गिरा था, जिससे यह झील तैयार हुई। इसलिए यहां एक पाषाण शिला को उसका रूप मानकर पूजा जाता है।

मान्यता है कि मानसरोवर झील और राक्षस झील, ये दोनों झीलें सौर और चंद्र बल को प्रदर्शित करती हैं, जिसका संबंध सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा से है। जब आप इन्हें दक्षिण की तरफ से देखेंगे तो एक स्वास्तिक चिह्न बना हुआ दिखेगा। इस अलौकिक जगह पर प्रकाश तरंगों और ध्वनि तरंगों का समागम होता है, जो ऊँ जैसा सुनाई देता है। मानसरोवर में बहुत-सी खास बातें आपके आसपास होती रहती हैं, जिन्हें आप केवल महसूस कर सकते हैं। झील लगभग 320 किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है। इस झील के आस-पास सुबह के 2:30 से 3:45 बजे के बीच कई तरह की अलौकिक क्रियाओं को केवल महसूस किया जा सकता है, देखा नहीं जा सकता।

मान्यता है कि इस सरोवर का जल आंतरिक स्रोतों के माध्यम से गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी में जाता है। पुराणों के अनुसार, शंकर भगवान द्वारा प्रकट किए गए जल के वेग से जो झील बनी, उसी का नाम मानसरोवर हुआ था। मानसरोवर पहाड़ों से आते हुए रास्ते में एक झील है, पुराणों में इस झील का जिक्र 'क्षीर सागरÓ से किया गया है। क्षीर सागर कैलाश से 40 किमी की दूरी पर है। धामिज़्क आस्था है कि विष्णु और माता लक्ष्मी इसी में शेष शैय्या पर विराजते हैं।

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