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संविधान बदलने की अर्जी, अनुच्छेद 31 'B' को बताया किसान विरोधी 

Publish Date: June 19 2018 02:34:16pm

मुंबई (उत्तम हिन्दू न्यूज) : देश में कृषि संकट के लिए संविधान के प्रावधानों को जिम्मेदार बताते हुए किसानों के एक समूह ने उच्चतम न्यायालय में उन्हें चुनौती दी है। महाराष्ट्र में किसान कार्यकर्ता अमार हबीब द्वारा शुरू किये गये किसान पुत्र आंदोलन (केपीए) ने 21 मार्च को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर संविधान के अनुच्छेद 31 बी और इसके तहत आने वाली नौवीं अनुसूची को रद्द करने का अनुरोध किया है। याचिका में अनुच्छेद और अनुसूची दोनों को किसान विरोधी बताया गया है। 

आंदोलन के सदस्यों का मानना है कि अनुच्छेद 31 बी रद्द किये जाने के बाद ऐसे कई कानूनों को चुनौती दी जा सकेगी जो देश में कृषि संकट के लिए जिम्मेदार हैं। केपीए के अनुसार, ऐसे कुछ कानून कृषि भूमि उच्चतम सीमा कानून, आवश्यक वस्तु अधिनियम और भूमि अधिग्रहण कानून का हिस्सा हैं और ये सभी संविधान की नौवीं अनुसूची के तहत आते हैं। गौरतलब है कि संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कानूनों की न्यायिक समीक्षा संभव नहीं है। शेतकारी संगठन के नेता दिवंगत शरद जोशी के करीबी सहयोगी रहे हबीब का कहना है कि वक्त बदल गया है और सरकार का रवैया भी। 

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि सड़क पर उतरकर आंदोलन करने की जगह केपीए ने कृषि संकट के प्रमुख कारण की पहचान की है और वह न्यायपालिका की मदद से उसे दूर करने का प्रयास कर रहा है। 
 
 

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