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जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक संकट के आसार, फिलहाल राष्ट्रपति शासन की संभावना

Publish Date: June 19 2018 03:30:18pm

श्रीनगर (उत्तम हिन्दू न्यूज) : भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के मसले पर जम्मू-कश्मीर के बीजेपी नेताओं से मुलाकात के बाद पीडीपी से गठबंधन तोडऩे का ऐलान कर दिया। इस बड़े फैसले से पहले शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से भी विचार-विमर्श किया था। गठबंधन क्यों तोड़ा गया यह तो रहस्य बना हुआ है लेकिन जो बीजेपी ने बताया है उसमें बहुत हद्द तक सत्यता दिखती है। गठबंधन तोड़े जाने के पीछे भाजपा ने दोनों पार्टियों की नीतियों में व्यापक अंतर को जिम्मेदार ठहराया है। इस मामले में भाजपा के नेता राम माधव का कहना है कि हमने विकास और शांति को लेकर गठबंधन किया था लेकिन हमारा लक्ष्य पूरा नहीं हुआ और अंततोगत्वा हमें गठबंधन तोडऩा पड़ा। 

इस मामले में पीडीपी के प्रवक्ता रफी अहमद मीर का बयान भी आ गया है। मीर ने कहा है कि हमने बीजेपी के साथ सरकार चलाने की पूरी कोशिश की लेकिन हम सफल नहीं हो पाए। मीर ने कहा कि बीजेपी के इस आकस्मिक निर्णय से हम आश्चर्यचकित हैं। हमें इस बात का संकेत भी नहीं था। उन्होंने कहा कि यह एक न एक दिन होना था लेकिन हमने कश्मीरियों के भलाई को ध्यान में रखकर ये फैसला किया था। इस मामले में अब तय हो गया है कि पीडीपी की सरकार गिर जाएगी और राज्य में अंततोगत्वा राष्ट्रपति शासन लगाने का रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि अभी कई फैसले होने बांकी हैं। वैसे श्रीनगर से जो खबर आ रही है उसमें बताया गया है कि महबूबा मुफ्ती आज शाम तक अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप देंगी। 

आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में साल 2015 में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन की सरकार बनी थी। गठबंधन के बाद मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बनाए थे। तब डिप्टी सीएम बीजेपी के खाते में गया था। उसके बाद जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की अचानक मौत के बाद राज्य में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया था। सईद की मौत के बाद करीब ढाई महीने तक सरकार गठन को लेकर घाटी में रस्सा-कस्सी चलती रही। 

जिसके बाद फिर पीडीपी-बीजेपी सरकार बनाने के लिए तैयार हो गई और मार्च 2016 में महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर की सरकार बनी। इस सरकार में उपमुख्यमंत्री बीजेपी के विधायक निर्मल सिंह को बनाया गया। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में 87 में से पीडीपी ने 28 जबकि बीजेपी के पास 25 सीटें जीती थीं एनसी और कांग्रेस को क्रमस: 15 और 12 सीटों हैं। भाजपा के समर्थन वापस ले लेने के बाद स्वाभाविक रूप से महबूबा सरकार अल्पमत में आ गयी है। 

हालांकि अब कांग्रेस और नेशनल कॉनफ्रेंस की क्या भूमिका होती है उस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। संभावना यह व्यक्त की जा रही है कि कश्मीर में जरूर कोई बड़ी बात सुरक्षा एजेंसियों के ध्यान में आयी है जिसके कारण भाजपा ने अपना पैर पीछे किया है। ऐसे परिस्थिति में कांग्रेस और एनके की भूमिका को देखना भी जरूरी होगा। फिलहाल भाजपा के समर्थन वापस ले लेने के बाद कश्मीर में संवैधानिक संकट तो खड़ा हो ही गया है। 

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