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एन एन वोहरा के बाद जानिए कौन हो सकता है जम्मू-कश्मीर का अगला राज्यपाल

Publish Date: June 20 2018 02:18:00pm

जम्मू (उत्तम हिन्दू न्यूज): जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा का कार्यकाल अगले सप्ताह समाप्त हो रहा है लेकिन अमरनाथ की वार्षिक यात्रा पूरी होने तक वह अपने पद पर बने रहेंगे और इसके बाद इस पद की जिम्मेदारी पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल दीपेंद्र सिंह हुड्डा को दी जा सकती है। शीर्ष आधिकारिक सूत्रों ने बताया, वोहरा का कार्यकाल जून के आखिर में समाप्त होगा, लेकिन वह इस पद पर बने रहेंगे क्योंकि 28 जून से अमरनाथ यात्रा शुरू हो रही है। इस दौरान केंद्र सरकार उनकी जगह किसी नये चेहरे को लाने की जोखिम नहीं उठा सकती है। 

सूत्रों ने बताया कि वोहरा 28 जून से 26 अगस्त यानी 58 दिनों तक चलने वाली  अमरनाथ यात्रा तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल बने रहेंगे। सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार  वोहरा के लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें वार्षिक तीर्थ यात्रा का प्रभारी बनाना चाहती है। 

बारह नवंबर 1956 को जन्मे जनरल हुड्डा को कश्मीर मामलों में विशेषज्ञता हासिल है। उन्होंने न केवल नगरोटा स्थित व्हाइट नाइट (16 कोर) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के तौर पर काम किया है बल्कि उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन चीफ भी रहे हैं। वह इस पद पर सितंबर 2016 में पाकिस्तानी सीमा के भीतर की गई सर्जिकल स्ट्राइक के समय तक थे। 

सूत्रों ने बताया कि केंद्र ने राज्यपाल के लिए पांच लोगों के नाम का चयन किया था जिसमें लेफ्टिनेंट डी एस हुड्डा, मेजर जनरल जी डी बशी, लेफ्टिनेंट जनरल अता हसनैन, जनरल बिक्रमजीत सिंह (सभी सेवा निवृत सैन्य अधिकारी) और दिनेश्वर शर्मा शामिल थे जिन्हें केन्द्र ने जम्मू कश्मीर मामले में विशेष वार्ताकार नियुक्त किया है। सूत्रों ने कहा, जानकारी मिली है कि केंद्र ने जम्मू-कश्मीर के अगले राज्यपाल के लिए लेफ्टिनेंट (सेवा निवृत) डी एस हुड्डा का चुनाव किया है लेकिन वह अमरनाथ यात्रा समाप्त होने के बाद ही पद ग्रहण करेंगे।

लेफ्टिनेंट जनरल हुड्डा को कश्मीर मामलों पर विशेषज्ञता हासिल है और वह मानवाधिकारों पर अधिक जोर देते हैं। चालीस वर्ष के अपने सेवा काल में उन्होंने भारत की उत्तरी तथा पूर्वी सीमाओं पर काम किया है। पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के छात्र रहे हुड्डा 15 दिसंबर 1976 को भारतीय सेना भर्ती हुए थे। उन्होंने अपने शुरुआती सेवा काल में चौथी गोरखा राइफल की चौथी बटालियन में काम किया और बाद में उसका नेतृत्व किया। भारतीय सेना में 40 वर्षों तक सेवा करने के बाद 30 नवंबर 2016 को वह सेवा निवृत हुए थे। 

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