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मानसून सत्र में पहले सरकार ने 17 जुलाई को बुलाई सर्वदलीय बैठक 

Publish Date: July 10 2018 02:07:37pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): 18 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। ये बैठक 17 जुलाई को होगी। 18 दिन तक चलने वाले सत्र में तीन तलाक सहित अन्य विधेयक सरकार के एजेंडा में टॉप पर रहने की संभावना है। आज लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन ने मॉनसून सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी सासंदों को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि लोकसभा का 16वां कार्यकाल अपने अंतिम वर्ष में प्रवेश कर चुका है। अब केवल 3 सत्र शेष रह गए हैं। समय सीमित है लेकिन बहुत सारा जरूरी कार्य अब भी अधूरा है. वक्त केवल मॉनसून और शीतकालीन सत्र के दौरान ही उपलब्ध होता है।  

महाजन ने पत्र में लिखा कि सदन की कार्यवाही के सुचारू संचालन से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर उन्होंने पूर्व में भी पत्रों के माध्यम से अपने विचार साझा किए थे जिनके प्रत्युत्तर में अनेक सदस्यों से उन्हें सकारात्मक एवं बहुमूल्य सुझाव भी प्राप्त हुए थे। उन्होंने विभिन्न दलों के नेताओं से सर्वदलीय बैठक के दौरान एवं व्यक्तिगत रूप से भी सभा के सुचारू संचालन हेतु समय-समय पर चर्चा की थी एवं सभी से सहयोग का निवेदन किया था।

उन्होंने कहा, अब 16वीं लोकसभा के कार्यकाल का अंतिम वर्ष प्रारंभ हो चुका है और मात्र तीन सत्र बचे हैं। समय कम है और काम ज्यादा और मुख्यत: मानसून सत्र और शीत सत्र में ही लोक सभा में विधायी कार्यों पर चर्चा एवं कार्य के लिए समय उपलब्ध रहेगा। इसके साथ ही सभी सदस्यों को अपने-अपने क्षेत्र के विकास कार्यों से संबंधित विषयों की चर्चा सभा में करनी है ताकि सभा की कार्यवाही में अपनी सहभागिता का विवरण अपने-अपने क्षेत्र में जाकर आम जनता को दे सके। उन्होंने कहा, अपने अनुभव के आधार पर मैं कह सकती हूं कि जनप्रतिनिधियों के कार्यों पर जनता की सीधी नजऱ होती है और मीडिया भी संसद और संसदीय क्षेत्र में उनके कार्यों का विस्तृत विवरण जनता के समक्ष प्रस्तुत करता है। सदन की अध्यक्ष होने के नाते मैं चाहूंगी कि देश की सबसे बड़ी पंचायत-लोक सभा में आप चुनकर आए हैं तो अपने दायित्वों का निर्वहन सक्षमता से करें। उन्होंने कहा कि 16वीं लोक सभा के कई सत्रों में उल्लेखनीय काम हुआ है, वहीं कुछ सत्रों में व्यवधान भी हुआ है। ऐसा कई बार हुआ है जब कुछ सदस्यों ने सभा के बीचों-बीच आकर नारे लगाए, तख्तियां और बैनर दिखाए और सभा की कार्यवाही में बाधा पहुंचाई। इसके परिणामस्वरूप सभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित हुई।

श्रीमती महाजन ने कहा कि विचार-विमर्श, मत-मतान्तर और सहमति-असहमति किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अभिन्न अंग होते हैं। इस प्रकार के विमर्श और सकारात्मक विरोध लोकतंत्र को प्राणवायु प्रदान करते हैं। लेकिन यह विमर्श, मतान्तर एवं असहमति स्वीकृत मर्यादाओं के अनुरूप और शालीनता की सीमाओं के भीतर ही होना चाहिए ताकि लोकतंत्र के प्रति जनता की आस्था अडिग रहे।

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