Tuesday, December 18,2018     ई पेपर
ब्रेकिंग न्यूज़
राष्ट्रीय

शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, राम मंदिर के लिए दान की जाए मुसलमानों के हिस्से की जमीन

Publish Date: July 13 2018 04:38:56pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : शिया वक्फबोर्ड ने आज श्री राम जन्म भूमि मंदिर निर्माण को लेकर एक बड़ा कदम उठाया और कहा कि चूकि मंदिर की जमीन शिया वक्फवोर्ड की है इसलिए शिया वक्फबोर्ड उसे हिन्दुओं को देने का निर्णय किया है। मसलन केंद्रीय शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वास्तव में अयोध्या में विवादित भूमि में मुसलमानों के शेयर का असल दावेदार वही है क्योंकि बाबरी मस्जिद मीर बाकी ने बनवाई थी, जो शिया थे। शुक्रवार को बोर्ड ने कहा कि वह इलाहाबाद हाई कोटज़् द्वारा मुसलमानों को दी गई एक तिहाई भूमि को राम मंदिर बनाने के लिए हिंदुओं को दान करना चाहता है।

इधर शिया वक्फ बोर्ड की ओर से वरिष्ठ वकील एस. एन. सिंह ने कहा, इस महान देश की एकता, अखंडता, शांति और सद्भाव के लिए शिया वक्फ बोर्ड अयोध्या की विवादित भूमि के मुसलमानों के शेयर को राम मंदिर निमाज़्ण के लिए दान करने के पक्ष में है। आपको बता दें कि शिया वक्फ बोर्ड पहले भी राम मंदिर के लिए मुसलमानों के हिस्से मिली जमीन को दान करने की बात कह चुका है। उधर, मुसलमानों और सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से पेश सीनियर ऐडवोकेट राजीव धवन ने कहा, बामियान बुद्ध की मूर्तियों को मुस्लिम तालिबान ने नष्ट किया था और बाबरी मस्जिद को हिंदू तालिबान की ओर से ध्वस्त किया गया। 

शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विवाद को सुलझाना चाहते हैं। बोर्ड ने साफ कहा कि बाबरी मस्जिद का संरक्षक एक शिया था और इसलिए सुन्नी वक्फ बोर्ड या कोई और भारत में मुसलमानों के प्रतिनिधि नहीं हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर भूमि विवाद पर जारी सुनवाई में मुस्लिम पक्षों की दलीलें चल रही हैं। इससे पहले चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस ए नजीर की विशेष पीठ ने 17 मई को हिंदू संगठनों की तरफ से पेश दलीलें सुनी थीं, जिनमें उन्होंने मुस्लिमों के इस अनुरोध का विरोध किया था कि मस्जिद को इस्लाम के अनुयायियों द्वारा अदा की जाने वाली नमाज का आंतरिक भाग नहीं मानने वाले 1994 के फैसले को बड़ी पीठ के पास भेजा जाए। 

अयोध्या मामले में मूल याचिकाकतार्ओं में शामिल और निधन के बाद कानूनी उत्तराधिकारियों द्वारा प्रतिनिधित्व पानेवाले एम सिद्दीकी ने एम इस्माइल फारूकी के मामले में 1994 में आए फैसले के कुछ निष्कर्षों पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने पीठ से कहा था कि अयोध्या की जमीन से जुड़े भूमि अधिग्रहण मामले में की गई टिप्पणियों का, मालिकाना हक विवाद के निष्कर्ष पर प्रभाव पड़ा है। हालांकि हिंदू संगठनों का कहना है कि इस मामले को सुलझाया जा चुका है और इसे फिर से नहीं खोला जा सकता है। शीर्ष अदालत की विशेष पीठ चार दीवानी वादों पर उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर विचार कर रही है। 

राम मंदिर के लिए होनेवाले आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला। टाइटल विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोटज़् में पेंडिंग है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला दिया था। फैसले में कहा गया था कि विवादित लैंड को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए। जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए जबकि बाकी का एक तिहाई लैंड सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए। 

इस मामले में अब शिया वक्फबोर्ड का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के द्वारा जो हिस्सा सुन्नी मुस्लिम वक्फबोर्ड को दिया गया है उसपर सुन्नी वक्फबोर्ड का कोई अधिकार ही नहीं बनता है। चूकि बाबरी मस्जिद का संरक्षक मीर बांकी था, जो शिया था। इसलिए वह जमीन शिया वक्फबोर्ड की जमीन है और उस जमीन को बोर्ड हिन्दुओं को देना चाहता है। इस आशय का एक आवेदन आज शिया वक्फ बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया है। 

WhatsApp पर न्यूज़ Updates पाने के लिए हमारे नंबर 7400043000 को अपने Mobile में Save करके इस नंबर पर Missed Call करें। फेसबुक-टिवटर पर हमसे जुड़ने के लिए www.fb.com/uttamhindu/ आैर www.twitter.com/DailyUttamHindu पर क्लिक करें आैर पेज को लाइक करें।


आईपीएल 12 की पहली बिक्री, 2 करोड़ में बिके हनुमा बिहारी

मुंबई (उत्तम हिन्दू न्यूज): आईपीएल 12 में खिलाडिय़ों की नीलामी शुरू हो गई है। भारतीय खिलाड...

ये थी श्रीदेवी की आखिरी इच्छा. पति बोनी कपूर करेंगे पूरी

मुंबई (उत्तम हिन्दू न्यूज): बॉलीवुड फिल्मकार बोनी कपूर अपनी प...

top