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हिमालयी राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिये विशेष पैकेज दे केन्द्र: हाईकोर्ट

Publish Date: July 20 2018 07:24:40pm

नैनीताल (उत्तम हिन्दू न्यूज) - उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य सेवा से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह देश के पहाड़ी राज्यों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि के लिये विशेष पैकेज उपलब्ध कराये। अदालत ने केन्द्र से अनुरोध किया कि राज्यों को विशेष पैकेज चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध करायें। अदालत ने सेना एवं निजी अस्पतालों को भी उनके संवैधानिक दायित्वों को याद दिलाते हुए कहा कि दुर्घटना एवं आपातकालीन स्थिति में मरीजों का इलाज बिना देरी के करें।

वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता दीपक रूबाली की जनहित याचिका की सुनवाई के बाद शुक्रवार को ये निर्देश जारी किये। याचिकाकर्ता ने नैनीताल स्थित बी.डी. पांडे जिला अस्पताल (महिला-पुरूष) एवं जी.बी. पंत अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य सेवा को लेकर एक जनहित याचिका 2009 में दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि अस्पताल में न तो चिकित्सक हैं और नहीं उपकरण और अन्य संबंधित स्टाफ मौजूद है। खंडपीठ ने आज जारी महत्वपूर्ण आदेश में सरकार को निर्देश दिये कि वह भवाली स्थित ऐतिहासिक टीवी सेनिटोरियम को छह माह के अंदर एक मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में तब्दील करे। अस्पताल को मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया और इंडियन हेल्थ स्टैंडर्ड के मानकों के अनुसार स्थापित करे। उसमें मानकों के अनुसार चिकित्सकों, नर्सों, पैरा मेडिकल स्टाफ के अलावा उपकरणों को स्थापित करें। खंडपीठ ने कहा कि सरकार अस्पताल के लिये तीन माह के अंदर डीपीआर एवं अन्य सभी प्रकार के प्रावधान सुनिश्चित करे। 

खंडपीठ ने सरकार को यह भी निर्देश दिया कि सरकार प्रदेश के सभी जिलों में तीन माह के अंदर एक-एक ट्रामा सेंटर स्थापित करें तथा सेंटर में हर समय चिकित्सक एवं अन्य स्टाफ की व्यवस्था हो। साथ ही सरकार प्रत्येक जिला अस्पताल, उप जिला अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में छह माह के अंदर चिकित्सकों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति करे और इंडियन हेल्थ स्टैंडर्ड के मानकों के आधार पर स्वास्थ्य सेवा से जुड़े उपकरणों की व्यवस्था करे। खंडपीठ ने कहा कि दुष्कर्म पीडि़तों के लिये अस्पतालों में अलग कक्ष की व्यवस्था भी की जाए। 
 

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