Monday, December 10,2018     ई पेपर
ब्रेकिंग न्यूज़
राष्ट्रीय

MBBS की ज्यादा फीस के कारण कर्ज के जाल में फंस रहे डॉक्टर

Publish Date: July 22 2018 10:08:36am

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : एक अध्ययन में जो बातें सामने आयी है वह सरकार के कई दावों को ठेंगा दिखाती है। जैसे, एक ओर सरकार यह कहती है कि हमारे पास डॉक्टरों की कमी है लेकिन दूसरी ओर वह न तो अपने स्वामित्व वाली संस्था में और न ही निजी मेडिकल कॉलेजों में फी नियंत्रण के लिए कोई कदम उठा रही है। यही कारण है कि दिन व दिन मेडिकल कॉलेजों के फी बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले सामान्य श्रेणि के विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक ऋण के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं होता है। 

मसलन प्राइवेट कॉलेजों से डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले स्टूड़ेंट्स लोन लेकर महंगी फी तो भार देते हैं लेकिन पढ़ाई के बाद उसे चुकाना उनके लिए बेहद कठिन हो जाता है। प्राइवेट कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों के लिए फी का गणित कुछ ऐसा बन रहा है कि पांचवे साल पढ़ाई पूरी कर निकलने के बाद उनपर 50 लाख रुपये तक का बोझ पड़ जाता है। औसतन एमबीबीएस के एक प्राइवेट कॉलज की वार्षिक ट्यूशन फी करीब 10 लाख रुपये है। पांच सालों की पढ़ाई के दौरान हॉस्टल, मेस, लाइब्रेरी, इंटरनेट और परीक्षाओं में शामिल कुल खर्च को जोड़ लें तो यह 50 लाख रुपये के पार कर जाता है। 

अब अगर 50 लाख के एजुकेशन लोन की ईएमआई की गणना करें तो यह हर महीने कम से कम 50 हजार रुपये तक तो बनती ही है। यदि इसे डॉक्टरों को मिलने वाली सैलरी से तुलना करें तो कुछ भी नहीं है। मसलन कई राज्यों में डॉक्टरों की की सैलरी 45000 से लेकर 65000 रुपये तक होती है। यदि किसी निजी अस्पताल में नौकनी मिलती है तो वहां तो और मारा मारी है। किसी निजी अस्पताल में फ्रेसर को 20 हजार प्रति माह की सैलरी से ज्यादा नहीं देेते। ऐसे में एजुकेशन लोन और उसका ईएमआई एक बड़ी समस्या बनकर सामने खड़ी हो जाती है। 

ऐसे में डॉक्टरों के लिए ईएमआई चुकाना ही भारी मुसीबत का सबब बन जा रहा है। सरकार एक तरफ ज्यादा प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को खोलने की अनुमति दे रही है। दूसरी तरफ डॉक्टरों की कमी का हवाला देते हुए एमबीबीएस की सीटें भी बढ़ाई जा रहीं हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या अधिक फी सरकार के इस उद्देश्य को चोट नहीं पहुंचा रही? क्या ईएमआई चुकाने के बाद एक डॉक्टर के पास अपनी जीविका चलाने लायक पैसा बच रहा है? 

कई बैंकों में बिना कोलैट्रल के 7 से 10 लाख से अधिक का एजुकेशन लोन नहीं दिया जा रहा। कोलैट्रल के रूप में अधिकतर घर या जमीन गिरवी रखी जाती है। इसकी मदद से संपत्ती की कीमत के बराबर का लोन मिल जाता है। सामान्तया 10-12 साल की अवधि वाले एजुकेशन लोन पर 10 से 12.5 फीसदी तक का ब्याज लगता है। अगर एजुकेशन लोन न हो तो कई अभिभावक अपने बच्चों की एमबीबीएस फी नहीं भर सकते। 

WhatsApp पर न्यूज़ Updates पाने के लिए हमारे नंबर 7400063000 को अपने Mobile में Save करके इस नंबर पर Missed Call करें। फेसबुक-टिवटर पर हमसे जुड़ने के लिए www.fb.com/uttamhindu/ आैर www.twitter.com/DailyUttamHindu पर क्लिक करें आैर पेज को लाइक करें।


ऋषभ पंत ने रचा इतिहास, ये कारनामा करने वाले पहले विदेशी विकेटकीपर बने 

एडिलेड (उत्तम हिन्दू न्यूज): एडिलेड ओवल मैदान पर जहां एक ओर भ...

'मर्दानी 2' में नजर आएंगी रानी मुखर्जी

मुंबई (उत्तम हिन्दू न्यूज): अभिनेत्री रानी मुखर्जी फिल्म '...

top