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बलात्कार के लिए फाँसी वाले विधेयक को विपक्ष का भी समर्थन

Publish Date: July 30 2018 06:44:37pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): बलात्कार के मामलों में फाँसी तक की सजा के प्रावधान वाले विधेयक पर आज लोकसभा में चर्चा शुरू हुई, जिसका सत्ता पक्ष के साथ लगभग सभी विपक्षी दलों ने समर्थन किया। गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक, 2018 सदन में चर्चा के लिए रखते हुए कहा कि यह महत्त्वपूर्ण समय है जब सभी दलों को एक साथ आना चाहिये। उन्होंने कहा कि देश में बलात्कार के, विशेषकर 16 साल तथा 12 साल से कम उम्र की बालिकाओं के साथ बलात्कार के, काफी मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में बेहद कठोर सजा की जरूरत है। यह विधेयक 23 जुलाई को लोकसभा में पेश किया गया था और आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश , 2018 का स्थान लेगा जो 21 अप्रैल को लागू किया गया था। 

रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन.के. प्रेमचंद्रन ने अपना सांविधिक संकल्प पेश करते हुये कहा कि वह विधेयक का समर्थन करते हैं, लेकिन जिस प्रकार इसे अध्यादेश के रूप में लाया गया वह इसके खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि वह बलात्कार के मामलों में कड़ी सजा के प्रावधानों का समर्थन करते हैं। साथ ही ऐसे मामलों में समयबद्ध जाँच, समयबद्ध सुनवाई और अपील निपटान की व्यवस्था तथा अग्रिम जमानत नहीं देने संबंधी प्रावधानों का भी उन्होंने समर्थन किया। 

विधेयक के अनुसार 12 साल से कम उम्र की बालिकाओं के साथ बलात्कार के दोषियों को कम से कम 20 साल की सजा तथा अधिकतम प्राणदंड दिये जाने तथा 16 साल से कम उम्र की किशोरियों के साथ बलात्कार के दोषियों को कम से कम 20 साल की सजा और अधिकतम ताउम्र कारावास का प्रावधान है। बारह साल से कम उम्र की बालिकाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म की स्थिति में न्यूनतम सजा आजीवन कारावास एवं अधिकतम मृत्युदंड और 16 साल से कम उम्र की बालिकाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म की स्थिति में न्यूनतम सजा ताउम्र कारावास होगी। 

साथ ही बलात्कार के अन्य मामलों में भी न्यूनतम सजा सात साल से बढ़ाकर 10 साल की गयी है। बलात्कार के सभी मामलों में सूचना मिलने के दो महीने के भीतर जाँच पूरी करनी होगी। सुनवाई पूरी करने के लिए भी दो महीने की समय सीमा तय की गयी है, जबकि अपील पर सुनवाई छह महीने के अंदर पूरी करनी होगी। प्रेमचंद्रन ने कहा कि विधेयक में यह स्पष्ट नहीं है कि सुनवाई पूरी करने की दो महीने की अवधि घटना के दिन से शुरू होगी या आरोप पत्र दाखिल करने के दिन से। 
 

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