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बालिका गृह रेप मामलाः केंद्र और राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी, बिहार बंद

Publish Date: August 02 2018 11:49:14am

पटना(उत्तम हिन्दू न्यूज)- बिहार के मुजफ्फरपुर में एक बालिका आश्रय गृह में 34 नाबालिग लड़कियों से दुष्कर्म के मामले में विपक्षी पार्टियों द्वारा बुलाए गए बंद से गुरुवार को रेल व सड़क यातायात प्रभावित हुआ। राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, समाजवादी पार्टी और लोकतांत्रिक जनता दल समेत विपक्षी दलों द्वारा राज्यव्यापी बंद का समर्थन किया जा रहा है। 

इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और बिहार राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने पीड़ि‍त बच्चियों की तस्वीरें चलाने पर भी नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इलेक्ट्रोनिक और प्रिंट मीडिया रेप पीड़ि‍त बच्चियों की माॅर्फ्ड तस्वीरें भी नहीं चलाएगी। इसके साथ ही नेशनल कमीशन फॉर द प्रोटेक्‍शन ऑफ चाइल्‍ड राइट्स (एनसीपीसीआर) को भी नोटिस भेजा है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि छोटी बच्चियों का कोई इंटरव्‍यू नहीं कराया जाएगा।

वामपंथी पार्टी के कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों ने रेलवे पटरियों को अवरुद्ध कर दिया जिससे गुरुवार सुबह एक दर्जन से अधिक ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ। रिपोटरें के अनुसार, दरभंगा, मधुबनी, जहानाबाद, गया, मुजफ्फरपुर, पटना और भोजपुर जिलों में ट्रेनों को रोक दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने सिवान, भोजपुर, नवादा, पटना, अरवाल, जगबाद जिलों में कई सड़कों को भी अवरुद्ध किया। मुजफ्फरपुर आश्रय गृह उस समय सुर्खियों में आया जब बिहार समाज कल्याण विभाग ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस (टीआईएसएस) द्वारा यहां किए गए सोशल ऑडिट के आधार पर एक मामला दर्ज कराया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सिफारिश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रविवार को मुजफ्फरपुर आश्रय गृह दुष्कर्म मामला अपने हाथ में ले लिया। 

मालूम हो कि पुलिस ने 44 लड़कियों के बयान रेकॉर्ड किए थे। वहीं सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने 2010 से लेकर 2018 के बीच ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ और अखबार को मिले फंड की डीटेल राज्य सरकार से मांगी है। मेडिकल जांच में कम से कम 34 बच्चों के साथ रेप की पुष्टि हुई है। कुछ पीड़ितों ने कोर्ट को बताया कि उन्हें नशीले पदार्थ दिए जाते थे और मारा-पीटा जाता था। उसके बाद रेप किया जाता था। कइयों को पेट में दर्द की शिकायत बनी रहती थी। कुछ लड़कियां खुद को सुबह उठकर निर्वस्र पाती थीं। एक नाबालिग बच्ची ने पुलिस को बताया कि उसे रात को खाने के बाद सफेद और गुलाबी गोलियां दी जाती थीं।

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