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मासूम बच्चियों से रेप के दोषी को मिलेगी फांसी की सजा, संसद ने लगाई मुहर 

Publish Date: August 06 2018 07:57:15pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार के मामलों में फाँसी और 16 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के साथ दुष्कर्म हाेने पर आजीवन कारावास की सजा के प्रावधान वाले विधेयक आज संसद की मुहर लग गई। यह विधेयक इस संबंध में पिछले दिनों जारी किये गए अध्यादेश का स्थान लेगा। राज्यसभा ने आज ध्वनिमत से दंड विधि संशोधन विधेयक को पारित कर दिया जिसमें छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार के मामलों में कड़ी सजा के उपरोक्त प्रावधान किये गये हैं। लोकसभा इसे गत सप्ताह पारित कर चुकी है। इस संबंध में अध्यादेश 21 अप्रैल को जारी किया गया था। 

गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में लगभग दो घंटे तक चली चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष की इस मांं को खारिज कर दिया कि इस विधेयक को सदन की संयुक्त प्रवर समिति के पास भेजा जाए और फांसी की सजा को आजीचन कारावास में बदला जाए। उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामलों में फांसी की सजा देने का प्रावधान करने को कहा था। मध्यप्रदेश, हरियाणा, अरुणाचलप्रदेश और उत्तरप्रदेश में ऐसे मामलों में फांसी की सजा का प्रावधान कर चुके हैं। रिजिजू ने कहा कि महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विधेयक में सभी आवश्यक प्रावधान किए गये हैं। उन्होंने कहा कि देश में बलात्कार के, विशेषकर 16 साल तथा 12 साल से कम उम्र की बालिकाओं के साथ बलात्कार के, काफी मामले सामने आ रहे हैं, इसलिए अपराधियों के लिए कठोर सजा के प्रावधान जरूरी हैं। 

उन्होंने बताया कि 16 साल से कम उम्र की बालिका के साथ बलात्कार करने पर न्यूनतम सजा दस साल से बढ़ाकर 20 वर्ष सश्रम कारावास किया गया है। इस मामले में अधिकतम सजा ताउम्र कैद और जुर्माना होगा। इसी तरह से 12 साल से कम उम्र की बालिकाओं के साथ बलात्कार के दोषियों को भी कम से कम 20 साल सश्रम कारावास की सजा का प्रावधान है। इन मामलों में मृत्युदंड भी दिया जा सकता है। सोलह साल से कम उम्र की बालिकाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म की स्थिति में न्यूनतम सजा ताउम्र सश्रम कारावास और जुर्माना होगी। बारह साल से कम उम्र की बालिकाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म की स्थिति में न्यूनतम सजा ताउम्र कारावास और जुर्माना होगी। इन मामलों में भी मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है। बलात्कार के अन्य मामलों में भी न्यूनतम सजा सात साल से बढ़ाकर 10 साल की गयी है।

रिजिजू ने कहा कि बलात्कार के सभी मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद दो महीने के भीतर जाँच पूरी करनी होगी। पहले जांच के लिए अवधि तीन माह थी। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बलात्कार से संबंधित मामले महिला अधिकारी ही दर्ज करे तथा वह दक्ष हो। जांच का काम भी महिला अधिकारी को ही सौंपा जाएगा। बलात्कार के मामले में किसी अधिकारी के खिलाफ भी मामला दर्ज करने के लिए पहले अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
गृह राज्य मंत्री ने कहा कि सभी अस्पतालों के लिए बलात्कार पीड़िता का नि:शुल्क इलाज आवश्यक होगा। इसके साथ ही सुनवाई के दौरान कोई वकील पीड़िता के चरित्र पर सवाल नहीं कर सकेगा। वह अदालत में महिला के चरित्र को लेकर कोई मुद्दा नहीं उठाएगा। मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट के संज्ञान में आने पर उसे तुरंत इसे उद्धृत करना होगा।उन्होंने कहा कि बलात्कार से जुड़े मामलों में फॉरेंसिक जाँच के लिए हर शहर में विशेष प्रयोगशालाएं बनायी जायेंगी। सुनवाई पूरी करने के लिए भी दो महीने की समय सीमा तय की गयी है, जबकि अपील पर सुनवाई छह महीने के अंदर पूरी करनी होगी।  रिजिजू ने कहा कि 12 साल और 16 साल से कम उम्र की बालिकाओं के साथ बलात्कार के मामलों में अग्रिम जमानत नहीं मिल सकेगी। 

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