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OBC आयोग को मिला संवैधानिक दर्जा, संसद में विधेयक पारित

Publish Date: August 06 2018 08:17:48pm

नयी दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित 123वें संविधान संशोधन विधेयक पर सोमवार को संसद की मुहर लग गई। राज्यसभा ने इसे मतविभाजन के जरिए सर्वसम्मति से पारित कर दिया जबकि लोकसभा इसे पिछले सप्ताह मंजूरी दे चुकी है। विधेयक पर मतविभाजन में इसके पक्ष में 156 मत पड़े और विरोध में एक भी मत नहीं पड़ा। सदन ने सरकार की ओर से लाये गये और लोकसभा द्वारा पारित संशोधन को 145 मतों से मंजूरी दी और इसके विरोध के कोई मत नहीं पड़ा। इससे पहले कुछ सदस्यों ने अपने संशोधनों को वापस ले लिया। विधेयक पर लगभग तीन घंटे तक चली चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद यह एस सी एसटी आयोगों की तर्ज पर काम करेगा। इसे वही शक्तियां आैर अधिकार प्राप्त होंगे जो एस सी एस टी आयोग को प्राप्त हैं। उन्हाेंने कहा कि ओबीसी आयोग की कोई सिफारिश राज्य सरकारों पर बाध्यकारी नहीं होगीं और इसका दायरा केंद्र सरकार होगा।

उन्हाेंने कहा कि आयोग में एक महिला सदस्य की भी नियुक्ति की जाएगी जिसकी व्यवस्था इसकी नियमावली में की जाएगी। इसके अलावा ओबीसी सूची में नयी जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल करने की अंतिम शक्ति संसद में निहित रहेगी। आयोग इस संबंध में केवल सिफारिश करेगा।गहलोत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकारें आरक्षण के पक्ष में है, थी अौर रहेंगी। समय समय पर भाजपा सरकारों ने यह सिद्ध किया है। पिछले चार साल में भाजपा का जनाधार बढ़ा है जो इसका सबूत है। यह विधेयक 31 जुलाई 2017 को राज्यसभा ने संशोधनों के साथ पारित किया था जिसे लोकसभा ने पिछले सप्ताह दो अगस्त को संशोधनों के साथ पारित किया था। 

जनता दल यूनाइटेड के राम चंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग काे संवैधानिक दर्जा देने का प्रस्ताव 25 वर्षाें से लंबित था और अब तक सत्तारूद्ध दलों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया जा रहा है यह अच्छी बात है लेकिन अति पिछड़ा वर्ग के लिए भी इसी तरह का आयोग होना चाहिए। शिवसेना के संजय राउत ने कहा कि अायोग से आरक्षण तक की बात होती है लेकिन जब तक आरक्षण समाप्त नहीं होगा तब तक देश आगे नहीं जा सकता है। अमीर और गरीब के बीच के अंतर को समाप्त करने की जरूरत है और इसके बगैर सभी को न्याय नहीं मिल सकता है। 

केन्द्रीय मंत्री एवं रिपब्लिकन पार्टी आॅफ इंडिया (अठावले) के प्रमुख रामदास अठावले ने कहा कि देश की आबादी का 52 फीसदी हिस्सा के लिए इस आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया जा रहा है। 28 वर्ष पहले पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिया गया था लेकिन उसके बाद आयोग को संवैधानिक दर्जा देने की कोशिश नहीं की गयी जिसके कारण इस वर्ग को इतनी लंबी अवधि तक इंतजार करना पड़ा है। इस पर हुयी चर्चा में अन्नाद्रमुक की विजिला सत्यनाथन, द्रमुक के टी के एस इलागोवन, भाजपा के विकास महात्मे, कांग्रेस के रिपुन बोरा और मधुसूदन मिस्त्री, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा, असंबंद्ध रीताब्रत बनर्जी और बीपीएफ के बिश्वजीत दैमरी ने भाग लिया। 

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