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राजपीपला में बनेगा आदिवासी म्यूजियम: रुपाणी

Publish Date: August 09 2018 07:44:45pm

तापी (उत्तम हिन्दू न्यूज): गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने गुरूवार को कहा कि राजपीपला में 100 करोड़ रुपये की लागत से आदिवासी म्यूजियम बनेगा। रूपाणी ने यहां के निझर में आज विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि गुजरात की गौरवशाली आदिवासी संस्कृति की परंपरा को जीवंत रखने के लिए सरकार कटिबद्ध है। आदिवासी संस्कृति की विरासत के जतन के लिए राजपीपला में एक सौ करोड़ रुपए की लागत से अलग म्यूजियम बनाने के निर्णय के साथ 40 एकड़ क्षेत्र में बिरसा मुंडा आदिवासी यूनिवर्सिटी के निर्माण से आदिवासी संस्कृति का जतन-संवर्धन होगा। 

आदिवासी समाज की बड़ी संख्या में उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने आदिवासियों की कुल देवी याहा मोगी माता की पूजा की और आदिवासी समाज के मसीहा बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित की। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने 46 लाख रुपए के विभिन्न योजनागत लाभों का वितरण करने के साथ ही खेलकूद, शिक्षा और पशुपालन सहित विभिन्न क्षेत्र की प्रतिभाओं का सम्मान किया। आदिवासियों का इतिहास भव्य और गौरवशाली है। गुजरात में उनके प्रति संवेदना है। अंग्रेजों और मुगलों के खिलाफ शहादत देने वाले आदिवासी बंधुओं के दिल में आजादी पूर्व से ही राष्ट्रभक्ति निहित है।

आजादी के आंदोलन में आदिवासी समाज के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए वेगड़ा भील की वीरता, महीसागर के मानगढ़ में गोविंद गुरु के नेतृत्व में 1600 आदिवासियों की शहादत, विजय नगर के शहीद, तात्या भील और रूपा नायक सहित आदिवासी वीरों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। डांग के राजाओं ने अंग्रेजों से लोहा लिया था। ऐसे अनेक आदिवासी क्रांतिवीरों की कुर्बानी इतिहास के पन्नों में समाई है। जंगल में बसे 196 गांवों को राजस्व गांव घोषित किया है। अब गुजरात का आदिवासी वैश्विक चुनौतियों का सामना कर वैश्विक फलक पर आगे बढ राष्ट्र के विकास में भागीदार बनेगा। आदिवासी क्षेत्रों में हुए विकास का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सहित आधारभूत सुविधाएं अंतिम छोर के नागरिक को मुहैया कराई हैं। वर्ष 2002 में सात एकलव्य मॉडल स्कूल थे, जो आज बढ़कर 91 हो गए हैं। इसी तरह, वर्ष 2001 में आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा की दर 47 फीसदी थी, जो बढ़कर 2011 में 62 फीसदी तक पहुंच गयी है। यह सरकार गरीबों, पीड़ितों और आदिवासियों के हित की संवेदनशील सरकार है।
 

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