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केरल में बाढ़ और बारिश का कहर जारी, मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 154 हुआ

Publish Date: August 17 2018 01:51:23pm

तिरुवनंतपुरम (उत्तम हिन्दू न्यूज): केरल में एक दर्जन से अधिक हेलीकॉप्टर, सैकड़ों रक्षा कर्मियों, एनडीआरएफ की टीमों और मछुआरों ने शुक्रवार को बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया। बीते 10 दिनों में इस भीषण आपदा से 154 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, शुक्रवार को छह लोगों के और मरने की पुष्टि हुई। हालांकि, शुक्रवार सुबह से कई जिलों में बारिश की रफ्तार कम हुई है।

पेरियार और इसकी सहायक नदियों में उफान से एनार्कुलम और त्रिशूर के कई कस्बे जलमग्न हो गए हैं। परावुर, कलाडी, चालाकुडी, पेरुं बवूर, मुवातुपुझा शामिल हैं।  चालाकुडी से टीवी चैनलों को वीडियो क्लिप भेजने वाले लोगों के एक समूह ने कहा,"हमारे पास खाना नहीं है और 150 लोग राहत कार्य की प्रतीक्षा कर रहे हैं।  

हजारों लोग अभी भी ऊंची इमारतों पर बैठे हैं और बचाए जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अकेले एनार्कुलम और त्रिशूर शिविरों में 50,000 से अधिक लोग फंसे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को फोन पर मुख्यमंत्री पिनारई विजयन के साथ बाढ़ की स्थिति पर चर्चा की और कहा कि वह स्थिति का जायजा लेने के लिए दिन के अंत तक राज्य जाएंगे।

विजयन ने शुक्रवार को कहा कि राज्य भर में 1,568 राहत शिविरों में 2.25 लाख लोग रह रहे हैं। मध्य केरल का पत्तनमतिट्टा जिला सर्वाधिक प्रभावित रहा। यहां पंबा नदी के उफान के कारण रानी और कोझेनचेरी जैसे कस्बे पूरी तरह से जलमग्न हैं। कोल्लम से नौका बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंची और रक्षाकर्मियों की सहायता से बचाव अभियान जारी रहा। राज्य की राजधानी के तटीय गांवों से सैकड़ों अनुभवी मछुआरों पत्तनमतिट्टा पहुंचे और बचाव अभियान शुरू कर दिया। हेलीकॉप्टर भी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। 

आलुवा के विधायक अनवर सदत ने कहा कि ईंधन की कमी बचाव में बाधा डाल रही है क्योंकि मौजूदा स्थिति में परिवहन का एकमात्र साधन नाव है। उन्होंने कहा कि स्थिति बहुत खराब हैं। अलुवा पूरी तरह से असहाय है। लोगों के पास पानी और भोजन नहीं है। हमारा एकमात्र सहारा मछुआरे हैं जो हमें बचा रहे हैं। मौसम विभाग ने शनिवार तक अगले 24 घंटों में कम बारिश होने का अनुमान जताया है।

मलाप्पुरम, कोझिकोड और वायनाड में राहत कार्य सुचारू ढंग से आगे बढ़ रहोहै। कोझिकोड और वायनाड में 20,000 से अधिक लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं।एर्नाकुलम और त्रिशूर के बीच रेल सेवा रद्द कर दी गई हैं। कुछ लंबी दूरी की ट्रेनें नगेरकोल सेक्टर के जरिए डाइवर्ट कर दी गई हैं।
 

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