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बड़े प्लान पर काम कर रही भारतीय सेना, सर्विस पीरियड 15 से बढ़कर होगी 20 साल

Publish Date: August 20 2018 11:35:54am

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : भारतीय सेन इस समय एक बड़े प्लान पर काम कर रही है। 2019 की शुरुआत में 12 लाख जवानों वाली यह पावरफुल आर्मी बिल्कुल नए रूप में सामने आ आएगी। सैन्य सूत्रों की माने तो इस दिशा में बड़ी तेजी से काम हो रहा है। भारतीय सेना को ज्यादा चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए सेना के भीतर चार स्टडी चल रही है, जिसके बाद कई ऐसे फैसले लागू किए जा सकते हैं जिससे सेना का ढांचा फैट फ्री बने यानी जिन वजहों से फैसले लेने में देरी होती है और मैन पावर की बर्बादी होती है, उनकी पहचान कर उन्हें बदला जा सके। ऐसे में सेना को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार करने का प्लान बनाया जा रहा है।

जानकार सूत्रों पर भरोसा करें तो स्टडी पर अक्टूबर में चर्चा होगी। नवंबर अंत तक इसे आर्मी चीफ के सामने और आखिर में रक्षा मंत्रालय को भेज दिया जाएगा। सेना के प्लान में उठाए जानेवाले महत्वपूर्ण कदमों में पाकिस्तान और चीन से लगती पश्चिमी और उत्तरी सीमा के लिए स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स ब्रिगेड तैयार करना भी शामिल है। आर्मी के भीतर इस पर स्टडी चल रही है कि कैसे हेडक्वॉर्टर में मैनपावर को कम किया जाए। आर्मी के विस्तार के साथ हेडक्वॉर्टर में तैनात अधिकारियों की संख्या बढ़ती रही है जिससे फ्रंटलाइन पर ट्रेंड और अनुभवी मैनपावर की उपलब्धता कम हुई है। वैसे ही ऑफिसर कैडर की कमी है और फ्रंटलाइन पर इनकी ज्यादा जरूरत महसूस की जाती रही है। 

एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक अभी सेना में कई ब्रांच और निदेशालय ऐसे हैं जो लगभग एक जैसा ही काम करते हैं। इस तरह की डुप्लिसिटी ऑफ टास्क को खत्म करने कि लिए स्टडी कर रही टीम अपनी सिफारिश देगी क्योंकि इससे मैनपावर के साथ ही वक्त भी ज्यादा लग रहा है। यह टीम इस पर भी फोकस कर रही है कि क्या कोई ऐसी ब्रांच हैं जिसे रीलोकेट किया जा सकता है यानी आर्मी हेडक्वॉर्टर से बाहर कोई ब्रांच निकाली जा सकती है ताकि ज्यादा ऑफिसर्स को फ्रंटलाइन यूनिट के लिए उपलब्ध कराया जा सके। 

सेना में सर्विस के नियम और शर्तों का भी रिव्यू किया जा रहा है। अभी तक नियम और शर्तों को लेकर आर्मी रेग्युलेशन-1987 माना जाता है। साथ ही डिफेंस मिनिस्ट्री के 1998 के लेटर के हिसाब से पेंशन के लिए मिनिमम सर्विस की लिमिट तय होती है। यह स्टडी की जा रही है कि क्या सर्विस के पैरामीटर बदलने की जरूरत है। माना जा रहा है कि पेंशन के लिए मिनिमम सर्विस की लिमिट बढ़ाई जा सकती है। एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक अभी तक के नियम और शर्त फंक्शनल जरूरतों के हिसाब से हैं लेकिन इन्हें भविष्य की जरूरत के हिसाब से कैसे किया जा सकता है, स्टडी इस पर हो रही है। 

दूसरे देशों की आर्मी और भारत के भीतर सेंट्रल गवर्नमेंट सहित दूसरी सर्विस में जो भी सर्विस रूल स्टैंडर्ड के हैं उन्हें भी देखा जा रहा है। उनकी कुछ अच्छी प्रैक्टिस यहां भी लागू की जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक सेना लो मेडिकल कैटिगरी से जूझ रही है यानी अनफिट जवानों और अधिकारियों की संख्या बढ़ रही है। आर्मी चीफ कई बार जवानों-अधिकारियों की हेल्थ को लेकर सलाह दे चुके हैं। इसके अलावा कई जवान प्रमोशन कैडर में जाने से मना कर देते हैं। 9 महीने की ट्रेनिंग के बाद 15 साल में जवान पेंशन पर जा सकते हैं। 

सूत्रों के मुताबिक जिस तरह हर साल जवान पेंशन पर जा रहे हैं और ट्रेंड लोगों की कमी हो रही है उससे सेना चितिंत है। स्टडी इस पर भी की जा रही है कि क्या पेंशन के लिए मिनिमम सर्विस पीरियड बढ़ाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक इसे 15 साल से बढ़ाकर 20 साल करने पर विचार चल रहा है। हालांकि इसमें ख्याल रखा जाएगा कि ऑपरेशन डिप्लॉइमेंट के लिए ऐज प्रोफाइल क्या रखना है, साथ ही जवान की लाइफटाइम कमाई क्या होगी। 

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