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गुरुकुल कांगड़ी में विवाद, मंत्री सत्यपाल की नियुक्ति पर सवाल

Publish Date: August 29 2018 04:20:48pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : देश के पहला डीम्ड विश्वविद्यालय (1902 में पित) गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार ने मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह को कुलाधिपति (चांसलर )नियुक्त किया है। इस पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कानून मंत्रालय से राय मांगी है कि यह हित संघर्ष व लाभ के पद के दुरूपयोग का मामला तो नहीं होगा।

मालूम हो कि राष्ट्रपति तो देश के कई केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (चांसलर) हैं। रविन्द्र नाथ टैगोर द्वारा शांति निकेतन में स्थापित विश्व भारती का कुलाधिपति प्रधानमंत्री होता है। दिल्ली के राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान का कुलाधिपति मानव संसाधन विकास मंत्री होता है। लेकिन कोई भी मंत्री किसी निजी/संस्था के डीम्ड विश्व विद्यालय का कुलाधिपति नहीं होता है।

इस विश्वविद्यालय को देश के बड़े आर्य समाजी स्वामी श्रद्धानंद ने स्थापित किया था। इसका पूरा खर्च विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मार्फत केन्द्र सरकार देती है और इसका संचालन आर्य समाज करता है। इसलिए मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह को गुरूकुल कांगड़ी वि.वि. का कुलाधिपति बनाये जाने से कुछ संगठनों, अध्यापक संघ के पदाधिकारियों ने नाराजगी जताते हुए इसे लाभ के पद का दुरूपयोग करने का मामला कहा है।

बीएचयू अध्यापक संघ के पूर्व पदाधिकारी दीपक मलिक का कहना है कि मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह के गुरूकुल कांगड़ी विश्व विद्यालय का कुलाधिपति पद स्वीकार करने से उन पर इस निजी विश्वविद्यालय को लाभ पहुंचाने का आरोप लग सकता है।

इस बारे में गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के अध्यापकों का कहना है कि सत्यपाल सिंह मंत्री बनने के पहले से इस विश्वविद्यालय के प्रबंधन बोर्ड के सदस्य रहे हैं। उनके अच्छे कार्य व अनुभव को देखते हुए विश्वविद्यालय का चांसलर चुना गया है। इसके लिए आर्य प्रतिनिधि सभा की दिल्ली, पंजाब व हरियाणा में बैठक हुई थी। सबकी सहमति से उनको कुलाधिपति चुना गया है।

इस मामले में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारी कुछ भी कहने से मना कर रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि इस पर कानून मंत्रालय की राय मांगी गई है। देखिए क्या राय देता है। मालूम हो कि सत्यपाल सिंह जाति के जाट हैं और पश्चिम उ.प्र. के रहने वाले हैं। वह भाजपा के टिकट पर बागपत से अजित सिंह के विरूद्ध चुनाव लड़े और जीते। उसके पहले वह मुंबई पुलिस कमिश्नर थे। उन्होंने योग व दर्शन पर कई पुस्तकें लिखी हैं।

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