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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश में फतवों पर लगाया बैन

Publish Date: August 30 2018 08:29:16pm

नैनीताल (उत्तम हिन्दू न्यूज) : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश में किसी भी प्रकार के फतवे जारी करने पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने धार्मिक संस्थाओं, संगठनों, पंचायतों, स्थानीय पंचायतों और जन समूहों द्वारा फतवा जारी करने पर रोक लगा दी है और फतवे को गैर संवैधानिक करार देते हुए इसे व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के खिलाफ करार दिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की युगल पीठ ने यह प्रतिबंध हरिद्वार जिले के लक्सर के एक गांव में नाबालिग युवती से दुष्कर्म के बाद गर्भवती होने और दबंगों के खिलाफ मुंह खोलने पर पंचायत ने पीड़िता को गांव से बाहर किये जाने के फतवे के प्रकाश में आने के बाद लगाया है।
 
न्यायालय ने पंचायत के फतवे जारी करने को गंभीर माना और कहा कि पीड़िता के साथ सहानुभूति व्यक्त करने के बजाय परिवार को गांव से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। अदालत ने कहा कि फतवे के लिये संविधान में कोई जगह नहीं है। अदालत ने कहा कि पंचायतों को फतवा जारी करने के बजाय पंचायती राज अधिनियम के तहत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। उन्हें फतवा जारी करने का अधिकार नहीं है। खंडपीठ ने फतवे गैर कानूनी घोषित करने के लिये उच्चतम न्यायालय के आदेशों का हवाला भी दिया। खंडपीठ ने हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को पीड़िता एवं उसके परिवार को तुरंत सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिये हैं। दरअसल अधिवक्ता विवेक शुक्ला द्वारा समाचार पत्र में छपी इस मामले की जानकारी खंडपीठ को दी गयी। खंडपीठ ने इस मामले को तुरंत कार्यवाही की और स्वतः संज्ञान लेते ही इस मामले में जनहित याचिका दायर कर ली।

अधिवक्ता शुक्ला ने खंडपीठ को बताया कि रूड़की के लक्सर कोतवाली के एक गांव में दबंगों के खिलाफ मुंह खोलने पर दुष्कर्म से पीड़ित युवती को परिवार सहित गांव से बाहर करने का फतवा जारी किया गया है। मामले के अनुसार एक परिवार के युवक ने अप्रैल 2018 में गांव की एक नाबालिग युवती के साथ दुराचार किया। युवती के गर्भवती होने का पता चलने पर मामले के निपटारे के लिये गांव में पंचायत बुलायी गयी। जिसमें आरोपी ने पीड़िता के साथ निकाह करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद पंचायत ने पीड़िता एवं उसके परिवार के खिलाफ फतवा जारी कर दिया कि यदि पीड़ित युवती इस मामले की शिकायत करती है तो उसे परिवार सहित गांव से निकाल दिया जाएगा। खंडपीठ ने आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही करने के भी निर्देश जारी किये हैं। 
 

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