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जन्माष्टमीः कृष्ण ने राधा से इसलिए नहीं की थी शादी, जानिए इसके पीछे का रहस्य  

Publish Date: September 03 2018 11:56:02am

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज)- देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर धूम मची  है। श्रीकृष्ण की आलौकिक लीलाओं के बारे में जितना बाखान किया जाए उतना कम है। श्रीकृष्ण के साथ हमेशा से ही राधा और रूकमणी का नाम जोड़ा जाता है। श्री कृष्ण और राधा में प्यार होने के बावजूद शादी नहीं की थी। जन्मअष्टमी के मौके पर हम आपकों इस रहस्य के बारे में बताने जा रहे है।

धर्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की 16,100 रानियां और 8 पटरानियां थीं। लेकिन राधा, श्रीकृष्ण की सिर्फ प्रेयसी थीं। कान्हा का विवाह राधा से नहीं हुआ था। कृष्णा महिलाओं की इच्छा का बहुत सम्मान करते थे। देवी रुक्मणी और मित्रविंदा की इच्छा का सम्मान करते हुए कान्हा ने स्वयंवर से इनका हरण किया था। पुराणों के अनुसार भगवान कृष्ण की पहली पत्नी रुक्मणी थीं। जिन्हें देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। रुक्मणी श्री कृष्ण से विवाह करना चाहती थीं लेकिन उनके भाई रुक्मी को यह विवाह मंजूर नहीं था इसलिए उन्हें कान्हा से भागकर शादी करनी पड़ी थी। रुक्मणी से शादी के बावजूद आज भी श्री कृष्ण का नाम राधा से साथ जोड़ा जाता है। 

राधा-श्रीकृष्ण के प्रेम को जीवात्मा और परमात्मा का मिलन कहा जाता है। जब भी हम राधा-श्रीकृष्ण की प्रेम कहानी सुनते हैं तो मन में यही सवाल आता है कि श्रीकृष्ण ने राधा से विवाह क्यों नहीं किया? इसके पीछे कई तरह की व्याख्याएं दी जाती हैं। जिसके बारे में कई प्राचीन मान्यताएं भी है। कुछ कवियों का कहना है कि प्राचीन समय में रुक्मिनी, सत्यभामा, समेथा श्रीकृष्णामसरा प्रचलित थी जिसमें राधा का कोई जिक्र नहीं मिलता है। 3228 ईसा पूर्व देवकी पुत्र श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। कुछ समय तक वह गोकुल में रहे और उसके बाद वृंदावन चले गए थे। श्रीकृष्ण राधा से 10 साल की उम्र में मिले थे। उसके बाद वह कभी वृंदावन लौटे ही नहीं। इसके अलावा कहीं यह जिक्र भी नहीं मिलता है कि राधा ने कभी द्वारका की यात्रा की हो। दक्षिण भारत के प्राचीन ग्रन्थों में राधा का कोई उल्लेख नहीं मिलता है। एक मत यह भी है कि राधा ने श्रीकृष्ण से विवाह करने से मना कर दिया था क्योंकि उन्हें लगता था कि वह महलों के जीवन के लिए उपयुक्त नहीं हैं। राधा एक ग्वाला थीं, जबकि लोग श्रीकृष्ण को किसी राजकुमारी से विवाह करते हुए देखना चाहते थे।

एक मत के अनुसार राधा ने एक बार श्रीकृष्ण से पूछा कि वह उनसे विवाह क्यों नहीं करना चाहते हैं? तो भगवान श्रीकृष्ण ने राधा को बताया कि कोई अपनी ही आत्मा से विवाह कैसे कर सकता है? श्रीकृष्ण का आशय था कि वह और राधा एक ही हैं। उनका अलग-अलग अस्तित्व नहीं है। राधा को यह एहसास हो गया था कि श्रीकृष्ण भगवान हैं और वह श्रीकृष्ण के प्रति एक भक्त की तरह थीं। वह भक्तिभाव में खो चुकी थीं, जिसे कई बार लोग भौतिक प्रेम समझ लेते हैं। इसलिए कुछ का मानना है कि राधा और श्रीकृष्ण के बीच विवाह का सवाल पैदा ही नहीं होता है, राधा और श्रीकृष्ण के बीच का रिश्ता एक भक्त और भगवान का है। श्रीकृष्ण और राधा एक दूसरे रूप से आत्मीय तौर पर जुड़े हुए थे इसीलिए हमेशा उन्हें राधा-कृष्णा कहा जाता है, रुक्मिनी-कृष्णा नहीं।

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