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SC/ST एक्ट में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को भेजा नोटिस 

Publish Date: September 07 2018 02:28:37pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : अब एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय में एससी/एसटी एक्ट को लेकर जंग के आसार दिखने लगे हैं। दरअसल, एससी/एसटी एक्ट में किए गए बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस मामले को लेकर कोर्ट ने केंद्र सरकार से 6 हफ्तों में जवाब मांगा है। कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा एक्ट में किए गए बदलाव के खिलाफ  दायर कुछ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस सरकार को जारी किया है। हालांकि कोर्ट ने फिलहाल इस एक्ट में हुए संशोधन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। 

इस एक्ट के खिलाफ गुरुवार को देश के कई स्थानों पर हिंसक प्रदर्शन हुए। कई राज्यों से जन-जीवन अस्त व्यस्त होने की भी खबर आयी है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में बंद का काफी असर देखने को मिला। कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर जाम लगा। इतना ही नहीं कई जगहों पर रेल पटरियों पर भी प्रदर्शनकारियों के प्रदर्शन के चलते लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। 

आपको बता दें कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोगों पर होने वाले अत्याचार को रोकने के मकसद से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम, 1989 बनाया गया था। जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में इस कानून को लागू किया गया था। इस कानून के तहत इन लोगों को समाज में एक समान दर्जा दिलाने के लिए कई प्रावधान किए गए है।

इन लोगों पर होनेवाले अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष व्यवस्था की गई है जिससे कि ये अपनी बात खुलकर रख सके। हाल ही में एससी-एसटी एक्ट को लेकर उबाल उस वक्त सामने आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के प्रावधान में बदलाव कर इसमें कथित तौर पर थोड़ा कमजोर बनाना चाहा। 

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के बदलाव करते हुए कहा था कि इस तरह के मामले में तुरंत गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। कोर्ट ने कहा था कि शिकायत मिलने पर तुरंत मुकदमा भी दर्ज नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शिकायत मिलने के बाद डीएसपी स्तर के पुलिस अफसर द्वारा शुरुआती जांच की जाएगी और जांच किसी भी सूरत में 7 दिन से ज्यादा समय तक नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट के बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल की बात को मानते हुए कहा था कि इस मामले में सरकारी कर्मचारी अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। कोर्ट के इस निर्णय का देश भर में विरोध हुआ और अनुसूचित समाज में यह संदेश गया कि सरकार इस एक्ट को कमजोर करने के फिराक में है। यह देखते हुए केन्द्र सरकार ने संसद में इस संबंधित विधान पारित कर इस एक्ट को और ज्यादा कठोर बना दिया। 

इसी को देखकर कुछ लोग इस कानून को संविधान की मूल धारणा के खिलाफ का आरोप लगाते हुए देश की सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। कई लोगों ने इस मामले में याचिका दाखिल की है। उन तमाम याचिका को देखकर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है। हालांकि कोर्ट ने फिलहाल इस एक्ट के खिलाफ किसी भी प्रकार की टिप्पणी से इनकार कर दिया और कहा कि अभी इसपर वह प्रतिबंध लागाने के पक्ष भी नहीं है। 
 

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