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सीबीआई निदेशक के अधिकार वापस लेने से पहले सरकार ने सेलेक्शन कमेटी से क्यों नहीं पूछा : सुप्रीम कोर्ट 

Publish Date: December 06 2018 02:58:06pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): सीबीआई में मचे घमासान के बीच आज देश की शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने मोदी सरकार से पूछा कि सीबीआई निदेशक के अधिकार वापस लेने पहले सेलेक्शन कमेटी की सलाह लेने में क्या मुश्किल थी? आज बहस की शुरूआत करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अखिल भारतीय सेवाएं के सदस्यों के मामले का निपटारा सीवीसी एक्ट, 2003 की धारा 8(2) के तहत होता है। सवाल यह है कि सीबीआई का निदेशक बनने के बाद क्या कोई व्यक्ति अखिल भारतीय सेवाएं का सदस्य रहता है? आलोक वर्मा मामले में बहस पूरी हो गई है और सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि सीबीआई बनाम सीबीआई विवाद दो टॉप अफसरों के बीच की ऐसी लड़ाई नहीं थी जो रातोंरात सामने आई। बेंच ने कहा कि केंद्र ने खुद माना है कि ऐसी स्थितियां पिछले 3 महीने से पैदा हो रही थीं। बेंच ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने सीबीआई डायरेक्टर की शक्तियों पर रोक लगाने से पहले चयन समिति की मंजूरी ले ली होती तो कानून का बेहतर पालन होता। सीजेआई ने कहा कि सीबीआई डायरेक्टर के कार्यकाल को दो साल तय करने के पीछे मकसद इस पद को स्थायित्व देना था। आलोक वर्मा की दलील है कि उनको छुट्टी पर भेजने का फैसला विनीत नारायण मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है और ये फैसला उनके चयन करने वाले पैनल की मंजूरी से लिया जाना चाहिए था।  

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