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टकराव की राजनीति

Publish Date: December 10 2017 12:36:18pm

पंजाब में 17 दिसम्बर को होने वाले निगम चुनावों के चलते प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर हो रही हिंसक झड़पों को देखते हुए वकील वरिन्द्र सिंह मत्तेवाल द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान 'जस्टिस ए.के. मित्तल एवं जस्टिस अमित रावल की खंडपीठ ने सरकार को हिदायत दी की बिना डी.सी. की इजाजत लिए जो राजनीतिक दलों की रैलियां, धरने और बैठकें हो रही हैं, उन्हें जायज नहीं ठहराया जा सकता है। इसके लिए पहले डी.सी. की इजाजत लेनी होगी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पंजाब के गृह सचिव सहित डी.जी.पी. को 13 दिसम्बर के लिए नोटिस जारी कर जवाब भी तलब कर लिया है और इसी दिन फिर सुनवाई किए जाने के आदेश दिए हैं। दायर याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया कि निगम चुनाव को लेकर राज्य के मुख्य दल कांग्रेस, अकाली और आम आदमी पार्टी के कार्यकत्र्ता अब एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए हैं तथा आपस में भिडऩे लगे हैं। कई जगह हिंसा पर भी उतारू हो चुके हैं। हाल ही में नामांकन के दौरान मल्लांवाला खास में गोलियां भी चल चुकी हैं। इसके अलावा पटियाला में भी ऐसी ही घटना हुई है। ऐसे में राज्य में कानून एवं व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। याचिकाकत्र्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि फिरोजपुर जिले के सभी एंट्री प्वाइंट्स और फ्लाई ओवर्स पर राजनीति से जुड़े लोगों ने कब्जा कह लिया है तथा वहां रैलियां, धरने और बैठकें की जा रही हैं। कुछ ऐसा ही हाल जिले के गांवों का भी है जिससे आम लोगों की सुरक्षा खतरे में आ गई है।'

टकराव की राजनीति के परिणामस्वरूप बढ़ती हिंसा तथा स्थानीय प्रशासन की एकपक्षीय भूमिका को लेकर पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और अकाली दल बादल के अध्यक्ष सुखबीर बादल धरना लगाने को मजबूर हो गए। अकालियों द्वारा प्रदेश के विभिन्न शहरों में धरना लगाने के कारण व्यवस्था प्र्रभावित हुई लेकिन अंत में सरकार ने अकालियों विरुद्ध लगी धारा 307 को हटाया और कांग्रेसी नेताओं को गिरफ्तार भी किया और धरने उठ गए।

निगम चुनाव को लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहली सीढ़ी कहा जा सकता है। यहीं से चुनाव लड़कर नई पीढ़ी विधानसभा, संसद स्तर के चुनावों के लिए तैयार होती है। अगर बुनियादी स्तर पर ही हिंसा चुनाव का हिस्सा बन जाती है तो भविष्य में यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए हानिकारक ही साबित होगी। उच्च न्यायालय ने हिंसा व टकराव की राजनीति पर नकेल डालने के लिए स्थानीय प्रशासन को सख्त कदम उठाने के लिए कहा है। प्रशासन के साथ-साथ राजनीतिक दलों और चुनाव में उतरे उम्मीदवारों को भी चाहिए कि वह अपने स्तर पर भी ऐसे कदम उठाए जिससे टकराव व हिंसा की बजाए लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत हो। स्थानीय स्तर पर ही नहीं प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को चाहिए कि वह नकारात्मक राजनीति का त्याग करते हुए तथा सकारात्मक ढंग को अपनाते हुए अपनी राजनीति करंे, ताकि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत हो सके। मतदाता को भी सतर्क हो अपना योगदान लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ही देना चाहिए।


इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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