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आहत बेटा

Publish Date: January 05 2018 01:19:07pm

चीफ खालसा दीवान के पूर्व अध्यक्ष चरणजीत सिंह चड्ढा की वायरल हुई वीडियो से मानसिक तनाव में चल रहे उनके बेटे इन्द्रप्रीत सिंह चड्ढा जो स्वयं संस्था के उपप्रधान थे ने अपने सिर पर गोली मार कर हत्या कर ली। प्राप्त समाचार अनुसार चड्ढा परिवार में तनाव के कई अन्य कारण भी थे लेकिन आत्महत्या का तत्काल कारण पिता की अश्लील वीडियों का वायरल होना और पिता की तलाश के लिए पुलिस का बेटे इन्द्रप्रीत से पूछताछ करना ही कहा जा सकता है।
चड्ढा परिवार की अमृतसर में ही नहीं बल्कि सिख समाज में भी एक विशेष पहचान है। चीफ खालसा दीवान के अध्यक्ष पद तक चरणजीत सिंह चड्ढा के पहुंचने तक का एक लम्बा सफर है। बेटा इन्द्रप्रीत घर के तनाव के कारण चंडीगढ़ रहने लगा था। लेकिन वहां भी पीजीआई में गरीब मरीजों की सहायता करना उसकी जिन्दगी का हिस्सा बन गया था।
पिता चरणजीत सिंह की वीडियो के सार्वजनिक होने से बेटा इतना आहत हुआ कि उसने अपनी जिन्दगी को समाप्त करने में ही बेहतरी समझी। पिता चरणजीत चड्ढा ने किन हालात में क्या किया यह तो पुलिस की छानबीन के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा, लेकिन पिता पर इतना गंभीर आरोप बेटा बर्दाश्त नहीं कर पाया।
काम, क्रोध और लोभ यह इंसान के पतन के कारण ही माने गये हैं। इन तीनों के प्रभाव में जब इंसान होता है तो उसके द्वारा लिए गए निर्णय गलत ही साबित होते हैं। लेकिन इनसे प्रभावित आदमी को न तो अपने भविष्य को लेकर चिंता होती है और न ही परिवार की।वह तो बस काम, क्रोध या लोभ किसी से भी प्रभावित हो कर्म कर देता है, परिणाम बाद में ही पता चलता है। चरणजीत सिंह चड्ढा के कारण जो दाग आज चड्ढा परिवार पर लगा है, उसको धो पाना  मुश्किल नहीं असम्भव सा लगता है।
चरणजीत चड्ढा का मामला कोई पहला मामला नहीं, आये दिन अवैध संबंधों व अश्लील वीडियो जैसे मामले समाचार पत्रों में सुर्खियों बनते रहते हैं और लोग ध्यान से पढ़ते भी हैं, लेकिन खुद कब इस कुएं में गिर जाते हैं वह उनको भी पता नहीं चलता। जब पता चलता है तब काफी देर हो चुकी होती है। 80 वर्ष से अधिक आयु वाले चरणजीत चड्ढा पर लगा आरोप गलत या सही है, इस बात को किनारे रखते हुए जहां चरणजीत चड्ढा के वर्तमान और भविष्य बारे सोचिये।
बेटे इन्द्रप्रीत ने आत्महत्या कर ली है, अगर कल को आरोप साबित हो जाते तो स्वयं सलाखों के पीछे होगा। पीछे परिवार समाज का सामना करने से घबराएगा जबकि परिवार के किसी सदस्य का कोई दोष नहीं है। बेटे इन्द्रप्रीत का भी कोई दोष नहीं था लेकिन पिता ने जो किया उसको बर्दाश्त नहीं कर सका।
आज समाज पश्चिम की ओर झुक रहा है, वहां ऐसे हादसे आम होते हैं। लेकिन इन हादसों से परिवार के सदस्य दबाव में नहीं आते, क्योंकि वहां ऐसे मामलों को परिवार से नहीं बल्कि व्यक्ति विशेष से जोड़ कर देखा जाता है। जिसने व्यक्तिगत रूप से जो कर्म किया होता है उसी को सजा या पुरुस्कार मिलता है। भारत में इकाई व्यक्ति नहीं परिवार माना जाता है, इसलिए परिवार के किसी एक सदस्य द्वारा किए कर्म का परिणाम चाहे वह बुरा है या अच्छा सारे परिवार को भुगतना पड़ता है।
भारतीय जीवनशैली के गुण अधिक है लेकिन किसी एक के किए की सजा परिवार की झोली में डाल देने की परम्परा गलत है। इन्द्रप्रीत चड्ढा को अगर इस बात का एहसास होता कि जो पिता ने किया वह स्वयं भुगतेगा तो वह शायद ही आत्महत्या करता। भारतीय जीवनशैली से प्रभावित होने के कारण वह पिता के किए को अपने साथ जोड़कर देखने व सोचने लगा और दबाव में आकर उसने अपनी जीवनलीला ही समाप्त कर ली।
उपरोक्त सारा मामला दु:खदाई है। इस सारे घटनाक्रम से हमें समाज की कमजोरियों के साथ-साथ इंसान के पतन का भी पता चलता है। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि जो मर्यादा और संयम में रहकर जीवन जीता है उसके लिए यही स्वर्ग है और अमर्यादित जीवन का अर्थ नरकनुमा जीवन ही है।

 -इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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